पुणे , मार्च 18 -- महाराष्ट्र में पुणे की एक अदालत ने मराठा सेवा संघ और संभाजी ब्रिगेड के संस्थापक 77 वर्षीय पुरुषोत्तम सूर्यभान खेड़ेकर और स्थानीय प्रकाशक 42 वर्षीय किशोर साहेबराव कडू को ब्राह्मण समुदाय के विरुद्ध कथित भड़काऊ लेखन से जुड़े एक मामले में बुधवार को दोषमुक्त कर दिया।

प्रथम श्रेणी न्यायाधीश पी. बी. पाटिल ने बचाव पक्ष के इस तर्क को स्वीकार कर लिया कि यह मामला आधारहीन था और दुर्भावनापूर्ण तरीके से दर्ज किया गया था। ठोस साक्ष्यों के अभाव में श्री खेड़ेकर और श्री कडू को सभी आरोपों से दोषमुक्त कर दिया गया।

श्री खेड़ेकर ने "शिवरायांच्या बदनामीची केंद्रे" (शिवाजी की बदनामी के केंद्र) शीर्षक से एक पुस्तक लिखी थी, जिसके मुखपृष्ठ पर छत्रपति शिवाजी महाराज और महाराष्ट्र विधानसभा के चित्र अंकित थे। पुस्तक में ऐसी टिप्पणियां थीं जिन्हें कुछ लोगों ने ब्राह्मण समुदाय के लिए आपत्तिजनक बताया था।

भारतीय जनता पार्टी के पूर्व पार्षद श्याम ज्ञानदेव सतपुते ने पुणे के बंड गार्डन पुलिस थाने में यह शिकायत दर्ज कराई थी कि यह पुस्तक समुदायों के बीच तनाव पैदा कर सकती है। राज्य की ओर से इस मामले की पैरवी के लिए विशेष वरिष्ठ सरकारी अधिवक्ताओं को नियुक्त किया गया था।

अधिवक्ता मिलिंद दत्तात्रेय पवार, हर्षवर्धन पवार, सुयोग गायकवाड़, सारंग बहिरट और डी. जाधव ने न्यायालय में श्री खेड़ेकर और श्री कडू का पक्ष रखा। उन्होंने तर्क दिया कि यह लेखन संविधान के प्रदत्त अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार के अंतर्गत आता है और इससे कोई वास्तविक सांप्रदायिक अशांति या हिंसा नहीं हुई।

श्री खेड़ेकर का बचाव करते हुए अधिवक्ता मिलिंद पवार ने कहा कि यह पुस्तक अमेरिकी लेखक जेम्स लेन के छत्रपति शिवाजी महाराज और उनकी माता महारानी जीजामाता के बारे में लिखे गए गलत और अपमानजनक लेखों का उत्तर थी। श्री जेम्स लेन ने पुणे के भंडारकर संस्थान से कुछ ब्राह्मण समुदाय के सदस्यों की सहायता से जानकारी प्राप्त की थी।

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