कोलकाता , जनवरी 20 -- पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों से कुछ महीने पहले, राज्य की राजनीति में सिंगूर केंद्र बिंदु बनता जा रहा है और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने 28 जनवरी को वहां एक प्रशासनिक बैठक आयोजित करने का निर्णय लिया है।
यह फैसला प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा पिछले रविवार को रद्द किए गए टाटा नैनो परियोजना स्थल का दौरा करने और दो कार्यक्रमों में भाग लेने के कुछ ही दिनों बाद लिया गया है। उन्होंने पहले एक प्रशासनिक बैठक की अध्यक्षता की थी और बाद में एक जनसभा को संबोधित किया तथा कई मुद्दों पर सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस पर निशाना साधा।
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री उसी मैदान पर बैठक करेंगीं और लाभार्थियों के बीच विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ वितरित करेंगी।
राज्य सचिवालय के सूत्रों ने कहा कि बंग्लार बारी (बांग्ला आवास) योजना के अंतर्गत लगभग 16 लाख और परिवारों के लिए पक्के मकानों के निर्माण की पहली किस्त भी जारी करेंगी।
तृणमूल कांग्रेस के सूत्रों ने संकेत दिया कि प्रशासनिक घोषणाओं के अलावा, सुश्री बनर्जी बैठक से एक मजबूत राजनीतिक संदेश भी दे सकती हैं, पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का दावा है कि वह प्रधानमंत्री और भाजपा को मुंहतोड़ जवाब दे सकती हैं।
हुगली जिले में तृणमूल कांग्रेस के सूत्रों ने कहा कि पार्टी के नेताओं एवं कार्यकर्ताओं को प्रधानमंत्री की रैली के तुरंत बाद मुख्यमंत्री के सिंगूर कार्यक्रम के लिए तैयार रहने को कहा गया था। इसके बाद, मुख्यमंत्री सचिवालय ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि किया कि सुश्री बनर्जी ने प्रशासनिक बैठक के लिए 28 जनवरी की तारीख तय की है। प्रशासनिक और पार्टी दोनों स्तरों पर तैयारियां शुरू हो चुकी हैं।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री की बैठक उसी स्थान पर आयोजित की जाएगी जहां प्रधानमंत्री ने अपने कार्यक्रम को संबोधित किया था।
सिंगूर की धरती पर प्रधानमंत्री ने राज्य सरकार की आलोचना करते हुए कहा था कि पश्चिम बंगाल में निवेश तभी आएगा जब कानून व्यवस्था में सुधार होगा। तृणमूल सूत्रों के अनुसार, ममता बनर्जी राज्य में औद्योगिक विकास एवं निवेश के आंकड़े प्रस्तुत कर प्रधानमंत्री के इस दावे का खंडन कर सकती हैं।
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री ने सिंगूर में अपनी बैठक के दौरान, क्षेत्र के लिए नए उद्योगों या निवेशों के संबंध में कोई विशिष्ट घोषणा नहीं की, जिससे कथित रूप से कई उपस्थित लोग निराश हुए।
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव इसी वर्ष के पहले छमाही में होने वाले हैं, ऐसे में इस ऐतिहासिक स्थान से दिए गए उनके संदेश के राजनीतिक महत्व पर बारीकी से नजर रखी जा रही है क्योंकि यह स्थान पूर्ववर्ती वाम मोर्चा सरकार के अंतिम वर्षों में सुश्री बनर्जी के ऐतिहासिक भूमि आंदोलन का उद्गम स्थल रहा है।
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