कोलकाता , मार्च 23 -- पश्चिम बंगाल में चुनावी माहौल के बीच मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पर्यटन परियोजना 'गेटवे ऑफ कोलकाता' के उद्घाटन और एक धार्मिक समारोह को लेकर राज्य में राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है।

राज्य पर्यटन विभाग द्वारा 'युगपुरुष ओंकारनाथ तोरण' नामक इस परियोजना का निर्माण कार्य पूरा कर लिया गया है। विधानसभा चुनावों की घोषणा के बाद आदर्श आचार संहिता लागू होने के कारण, मुख्यमंत्री इसका आधिकारिक उद्घाटन नहीं कर पाई हैं।

सूत्रों के अनुसार, आगामी बुधवार को अखिल भारतीय जयगुरु संप्रदाय और ओंकारनाथ मिशन से जुड़े हजारों श्रद्धालु अपने आध्यात्मिक नेता किंकर विट्ठल रामानुज महाराज की जयंती मनाने के लिए बरानगर के पास महामिलन मठ में एकत्रित होंगे। ओंकारनाथ मिशन द्वारा जारी निमंत्रण पत्रों के अनुसार, इस सभा के बाद श्रद्धालुओं के बीटी रोड पर सरकार द्वारा निर्मित इस संरचना की ओर बढ़ने और गेट के ऊपर एक धार्मिक झंडा फहराने की उम्मीद है, जिससे प्रतीकात्मक रूप से इस प्रवेश द्वार को खोल दिया जाएगा।

इस घटनाक्रम ने विपक्षी दलों, विशेष रूप से वामपंथ और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बीच बेचैनी पैदा कर दी है, जिन्हें इस कदम के पीछे राजनीतिक मंशा होने का संदेह है। हालांकि दोनों पक्षों के नेताओं ने आधिकारिक बयान देने से परहेज किया है, लेकिन अनौपचारिक रूप से सुझाव दिया है कि चुनाव आयोग को इस मामले का संज्ञान लेना चाहिए।

विपक्षी सूत्रों के मुताबिक, इस संरचना का स्थान रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि बरानगर, कमरहाटी, पानीहाटी, उत्तर दमदम, खरदह के साथ-साथ हुगली नदी के उस पार बाली और उत्तरपाड़ा के हिस्से इसके निकट आते हैं। उनका आरोप है कि यह आयोजन इन क्षेत्रों के मतदाताओं को प्रभावित कर सकता है। भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने टिप्पणी की कि राज्य भर में जयगुरु समुदाय के हजारों अनुयायियों की उपस्थिति से सत्ताधारी दल को लाभ हो सकता है।

दूसरी ओर, ओंकारनाथ मिशन ने किसी भी राजनीतिक मंशा से इनकार किया है। मिशन के अध्यक्ष प्रियनाथ चट्टोपाध्याय ने कहा कि यह आयोजन पूरी तरह से धार्मिक है और श्रद्धालुओं द्वारा संचालित है। उन्होंने कहा कि कोलकाता का गेटवे बनाने का निर्णय चुनाव से बहुत पहले लिया गया था और हर साल इस अवसर पर हजारों श्रद्धालु जुटते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे उन्हें झंडा फहराने से नहीं रोक सकते।

यह तोरण आधुनिक वास्तुकला के साथ आध्यात्मिकता का मिश्रण है। लगभग 3.21 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित, राजस्थान की बंसीभट्ट पहाड़ियों से लाए गए गुलाबी बलुआ पत्थर से बनी 72 फीट ऊंची ये जुड़वां संरचनाएं महामिलन मठ परिसर का भव्य प्रवेश द्वार बनाती हैं। इसमें राजस्थानी कारीगरों द्वारा की गई नक्काशी और भगवान कृष्ण तथा ओंकारनाथ देव की मूर्तियां शामिल हैं।

परियोजना से जुड़े अधिकारियों का दावा है कि इसे विक्टोरिया मेमोरियल और हावड़ा ब्रिज की तर्ज पर कोलकाता के पर्यटन मानचित्र में एक प्रमुख जुड़ाव के रूप में देखा जा रहा है। इसमें 600 फीट का 'कोलकाता वॉक' और प्रस्तावित 'बांगलार हाट' भी शामिल है।

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