कोलकाता , जनवरी 10 -- पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को एक पत्र लिखकर राज्य में मतदाता सूची के 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (एसआईआर) के दौरान आम नागरिकों के साथ किए जा रहे 'निरंतर उत्पीड़न' पर हैरानी और पीड़ा व्यक्त की है।

मुख्यमंत्री ने पत्र में आरोप लगाया है कि इस पुनरीक्षण अभ्यास के कारण 77 मौतें, आत्महत्या के चार प्रयास और कम से कम 17 लोगों के बीमार होने व अस्पताल में भर्ती होने की नौबत आई है। उन्होंने कहा, "ये घटनाएं डर, डराने-धमकाने और अत्यधिक कार्यभार के कारण हुई हैं, जो आयोग द्वारा किए गए एक अनियोजित अभ्यास का परिणाम है।"सुश्री बनर्जी ने नोबेल पुरस्कार विजेता प्रोफेसर अमर्त्य सेन, प्रसिद्ध कवि जॉय गोस्वामी, लोकप्रिय फिल्म अभिनेता और सांसद दीपक अधिकारी, अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर मोहम्मद शमी और भारत सेवाश्रम संघ के महाराज के मामलों का जिक्र करते हुए सवाल किया कि क्या यह आयोग की ओर से 'सरासर ढिठाई' है। उन्होंने कहा कि कई आम नागरिक भी इसी तरह के उत्पीड़न का सामना कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा, "यह 'गहरे शर्म' की बात है कि 90 वर्ष से अधिक उम्र के और विश्व स्तर पर सम्मानित बुद्धिजीवी प्रोफेसर अमर्त्य सेन को अपनी साख साबित करने के लिए आयोग के अधिकारियों के सामने पेश होने को कहा गया।" उन्होंने आरोप लगाया कि शादी के बाद अपनी ससुराल जाने वाली और उपनाम बदलने वाली महिला मतदाताओं से पूछताछ की जा रही है और उन्हें अपनी पहचान साबित करने के लिए बुलाया जा रहा है।

सुश्री बनर्जी ने कहा कि यह सामाजिक संवेदनशीलता की पूर्ण कमी को दर्शाता है और महिलाओं व वास्तविक मतदाताओं का गंभीर अपमान है। उन्होंने सवाल किया कि क्या एक संवैधानिक प्राधिकरण को आधी आबादी (मतदाताओं) के साथ ऐसा व्यवहार करना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने पर्यवेक्षकों और 'माइक्रो-ऑब्जर्वर' की नियुक्ति पर भी चिंता जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें इस तरह के संवेदनशील कार्य के लिए बिना पर्याप्त प्रशिक्षण या विशेषज्ञता के एकतरफा तौर पर नियुक्त किया गया।

पत्र में आरोप लगाया गया है कि इस प्रक्रिया में कई विसंगतियां हैं। उन्होंने लिखा, "ऐसी विसंगतियों की संख्या प्रतिदिन बढ़ रही है। पश्चिम बंगाल में उपयोग किया जा रहा पोर्टल अन्य राज्यों में उपयोग किए जाने वाले पोर्टलों से अलग प्रतीत होता है। मामलों के निपटान के लिए शुरुआत में दिए गए विकल्पों को अनिश्चित तरीके से बदला जा रहा है। इससे अधिकारियों में भ्रम पैदा हो रहा है और यह पात्र मतदाताओं को मताधिकार से वंचित करने का एक जानबूझकर किया गया प्रयास है।"सुश्री बनर्जी ने प्रवासी श्रमिकों और राज्य से बाहर रहने वाले लोगों की चिंताओं पर देरी से प्रतिक्रिया देने के लिए भी आयोग की आलोचना की।

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