कोलकाता , जनवरी 25 -- पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने रविवार को राष्ट्रीय मतदाता दिवस के मौके पर चुनाव आयोग (ईसीआई) पर तीखा हमला बोला और उस पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के इशारे पर काम करने और लोगों को उनके लोकतांत्रिक अधिकारों से योजनाबद्व तरीके से वंचित करने का आरोप लगाया।
सुश्री बनर्जी ने एक बयान में कहा " राष्ट्रीय मतदाता दिवस मनाना एक दुखद मज़ाक बन गया है, क्योंकि आयोग लोगों के वोटिंग अधिकार छीनने में व्यस्त है।" उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि चुनाव आयेग "अपने मालिक की आवाज़" के रूप में काम कर रहा है। सुश्री बनर्जी ने कहा कि वह इसके बर्ताव से बहुत दुखी और परेशान हैं।
मुख्यमंत्री ने चुनाव निकाय पर उच्चतम न्यायालय के निर्देशों की अवहेलना करने और नागरिकों के मतदान अधिकारों की रक्षा के लिए तय नियमों और मानदंडों का पालन करने में विफल रहने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि आयोग मतदाताओं को परेशान करने और उन्हें उनके चुनावी अधिकारों से वंचित करने के लिए "तार्किक विसंगति के नाम पर नए-नए बहाने" बना रहा है।
मुख्यमंत्री उन आरोपों का जिक्र कर रही थीं कि उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के बावजूद जिसमें चुनाव आयोग को एसआईआर सुनवाई केंद्रों पर दस्तावेज जमा करने वाले लोगों को रसीद जारी करने के लिए कहा गया था, कोलकाता और पूरे जिलों में कई मतदाताओं ने शिकायत की है कि उन्हें कोई पावती, रसीद या जमा करने का सबूत नहीं दिया जा रहा है। मतदाताओं ने शिकायत की है कि जब वे रसीद मांगते हैं, तो अधिकारी दावा करते हैं कि उनके पास इसे जारी करने के लिए कोई दिशानिर्देश नहीं है, जिससे सुनवाई के लिए बुलाए गए लोगों के पास कोई दस्तावेजी सबूत नहीं होता कि उन्होंने प्रक्रिया का पालन किया है।
सुश्री बनर्जी ने आरोप लगाया कि आयोग विपक्ष को कुचल रहा है और भारतीय लोकतंत्र की नींव को नष्ट कर रहा है, जबकि वह मतदाता दिवस मनाने का दावा कर रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा "भाजपा जो उनकी मालिक है, उसकी ओर से वे विपक्ष को कुचलने और भारतीय लोकतंत्र की नींव को नष्ट करने में व्यस्त हैं, और फिर भी उनमें मतदाता दिवस मनाने की हिम्मत है।"उन्होंने चुनाव आयोग पर लोगों को अभूतपूर्व यातना देने का आरोप लगाया और दावा किया कि उसके कामों से हुए तनाव के कारण 130 से ज़्यादा लोगों की मौत हो गई है।
सुश्री बनर्जी ने इस प्रक्रिया की नैतिकता पर सवाल उठाते हुए कहा कि क्या 85, 90 या 95 साल के लोगों के साथ-साथ शारीरिक रूप से विकलांग व्यक्तियों को अपनी पहचान साबित करने के लिए अधिकारियों के सामने शारीरिक रूप से पेश होने के लिए बुलाना उचित है। मुख्यमंत्री के अनुसार, अवैध दबाव और उत्पीड़न से आत्महत्याएं और मौतें हो रही थीं, जबकि आयोग राजनीतिक आकाओं के इशारे पर अपना काम जारी रखे हुए था। उन्होंने इस कार्रवाई की तुलना "नागरिकों के लिए एनआरसी ट्रायल" से की, और आरोप लगाया कि अल्पसंख्यकों, अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों को खास तौर पर निशाना बनाया जा रहा है।
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