कोलकाता , अप्रैल 06 -- पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग की भूमिका पर संदेह जताते हुए सवाल उठाया कि क्या आयोग की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के साथ-साथ द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) और कांग्रेस जैसे विपक्षी सहयोगियों के साथ भी कोई 'सांठगांठ' है।
सुश्री बनर्जी ने नादिया जिले के नकाशिपारा में रैली को संबोधित करते हुए सीधे-सीधे द्रमुक अध्यक्ष एमके स्टालिन का नाम लिया तथा आयोग, कांग्रेस और स्टालिन के बीच किसी संभावित 'आंतरिक सांठगांठ' पर संदेह व्यक्त किया।
उनकी ये टिप्पणियां एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम को दर्शाती हैं क्योंकि अब तक वह लगातार भाजपा और चुनाव आयोग पर मिलकर काम करने का आरोप लगाती रही हैं लेकिन इससे पहले उन्होंने सार्वजनिक रूप से विपक्षी सहयोगियों पर इस तरह का सवाल नहीं उठाया था।
सुश्री बनर्जी पश्चिम बंगाल से अन्य राज्यों में आईएएस और आईपीएस अधिकारियों के बड़े पैमाने पर तबादलों का विरोध तब से कर रही हैं, जब से यह चुनावी प्रक्रिया शुरू हुई है। उन्होंने इस कदम के पीछे की मंशा पर सवाल उठाया, जिसे उन्होंने राज्य से अधिकारियों को 'अंधाधुंध हटाने' जैसा बताया। उन्होंने तबादलों का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल के अधिकारियों को असमान रूप से तमिलनाडु भेजा गया है, जिससे यह संकेत मिलता है कि इसके पीछे कोई गहरी साजिश है।
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