, Jan. 5 -- वर्ष 1953 में प्रदीप कुमार- बीना राय अभिनीत फिल्म अनारकली. की सफलता के बाद सी.राम चंद्र शोहरत की बुंलदियों पर जा पहुंची । फिल्म अनारकली में उनके संगीत से सजे ये गीत ..जाग दर्द इश्क जाग . ये जिंदगी उसी की है ..श्रोताओं के बीच आज भी लोकप्रिय है ।वर्ष 1953 में सी.राम चंद्र ने फिल्म निर्माण के क्षेत्र में भी कदम रखा और ..न्यू सांई प्रोडक्शन..का निर्माण किया जिसके बैनर तले उन्होंने झंझार,लहरें और दुनिया गोल है जैसी फिल्मों का निर्माण किया लेकिन दुर्भाग्य से इनमें से कोई भी फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सफल नही हुयी जिससे उन्हें काफी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा। इसके बाद उन्होंने फिल्म निर्माण से तौबा कर ली और अपना ध्यान संगीत की ओर लगाना शुरू कर दिया ।

वर्ष 1954 मे प्रदर्शित फिल्म नास्तिकमें उनके संगीतबद्ध गीत..देख तेरे संसार की हालत क्या हो गयी भगवान कितना बदल गया इंसान ..समाज में बढ़ रही कुरीतियों पर उनका सीधा प्रहार था। पचास के दशक में स्वर साम्राग्यी लता मंगेश्कर ने संगीतकार सी.रामचन्द्र की धुनो पर कई गीत गाये । फिल्म अनारकली के गीत ये जिंदगी उसी की है .जाग दर्दे इश्क जाग.जैसे गीत इन दोनों फनकारों की जोड़ी की बेहतरीन मिसाल है।साठ के दशक मे पाश्चात्य गीत. संगीत की चमक से फिल्मकार अपने आप को नहीं बचा सके और धीरे धीरे निर्देशकों ने सी.रामचंद्र की ओर से अपना मुख मोड़ लिया लेकिन वर्ष 1958 में प्रदर्शित फिल्म .तलाक . और वर्ष 1959 मे प्रदर्शित फिल्म .पैगाम. में उनके संगीतबद्ध गीत ..इंसान का इंसान से हो भाईचारा ..की कामयाबी के बाद सी.राम चंद्र एक बार फिर से अपनी खोयी हुई लोकप्रियता पाने में सफल हो गये ।

वर्ष 1962 में देश के वीरों को श्रद्धाजंलि देने के लिये कवि प्रदीप ने ..ऐ मेरे वतन के लोगो जरा आंख में भर लो पानी ...गीत की रचना की और उसका संगीत बनाने की जिम्मेवारी सी.रामचंद्र को दी।सी.रामचंद्र के संगीत निर्देशन में एक कार्यक्रम के दौरान लता मंगेश्कर की आवाज में देशभक्ति की भावना से परिपूर्ण इस गीत को सुनकर तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू की आंखों मे आंसू छलक आये थे। इसे ..आज भी भारत के महान देशभक्ति गीत के रूप मे याद किया जाता है।साठ के दशक में सी.राम चंद्र ने धनंजय और घरकुल जैसी मराठी फिल्मों का निर्माण किया । सी .रामचंद्र ने इन फिल्मों में अभिनय और संगीतनिर्देशन भी किया । संगीत निर्देशन के अलावे सी.रामचंद्र ने अपने पार्श्वगायन से भी श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया। इन गीतों में मेरी जान मेरी जान संडे के संडे कदम कदम बढ़ाये जा खुशी के गीत गाये जा, भोली सूरत दिल के खोटे नाम बड़े और दर्शन छोटे, शोला जो भड़के दिल मेरा धड़के,कितना हसीं है मौसम कितना हसीं सफर है,अरे जा रे हट नटखट ना छू रे मेरा घूंघट जैसे न भूलने वाले गीत शामिल है ।

सी.राम चंद्र ने अपने चार दशक लंबे सिने करियर में लगभग 150 फिल्मों को संगीतबद्ध किया । उन्होंने हिंदी फिल्मों के अलावा तमिल. मराठी .तेलगु और भोजपुरी फिल्मों को भी संगीतबद्ध किया।अपने संगीतबद्ध गीतों से श्रोताओं के दिलो में खास पहचान बनाने वाले संगीतकार सी.रामचंद्र पांच जनवरी 1982 को इस दुनिया को अलविदा कह गये।

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