बारां , जनवरी 11 -- राजस्थान में बारां में मनरेगा बचाओ संग्राम जन आंदोलन के तहत रविवार को जिला कांग्रेस ने जिला मुख्यालय पर कलेक्ट्रेट परिसर स्थित महात्मा गांधी की प्रतिमा के सम्मुख एक दिवसीय उपवास रखकर धरना दिया।

धरने में बड़ी संख्या में कांग्रेस पदाधिकारियों, जनप्रतिनिधि शामिल हुए। इस अवसर पर अंता विधायक प्रमोद जैन भाया ने धरने में सम्बोधित करते हुए कहा कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारण्टी अधिनियम (मनरेगा) जिसे वर्ष 2005 में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार द्वारा लागू किया गया था, एक अधिकार आधारित कानून है जो प्रत्येक ग्रामीण परिवार को मजदूरी रोजगार की मांग करने का वैधानिक अधिकार देता है।

उन्होंने कहा कि कानून के तहत राज्य सरकार 15 दिनों के भीतर रोजगार उपलब्ध कराने के लिए बाध्य है, अन्यथा बेरोजगारी भत्ता देय होता है। यही वैधानिक गारण्टी मनरेगा की मूल विशेषता है।

कांग्रेस जिलाध्यक्ष रामचरण मीणा ने कहा कि मनरेगा ग्रामीण आजीविका सुरक्षा की रीढ रही है। जिला प्रमुख उर्मिला जैन भाया ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा बजट का सीमित आवंटन, कृषि के विषम मौसम में कार्य पर प्रतिबन्ध और मजदूरी सुरक्षा प्रावधानों का कमजोर होने से ग्रामीण क्षेत्र में संकट बढ़ेगा। इस योजना से महात्मा गांधी के नाम को हटाया जाना भी श्रम की गरिमा और ग्राम स्वराज के उन मूल्यों को कमजोर करने का प्रयास है जिन पर मनरेगा आधारित है।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित