नयी दिल्ली , जनवरी 04 -- केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने रविवार को कांग्रेस पर तीखा हमला करते हुए कहा कि कांग्रेस का तथाकथित "मनरेगा बचाओ संग्राम" दरअसल "भ्रष्टाचार बचाओ संग्राम" है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस इसलिए बेचैन है क्योंकि अब भ्रष्टाचार के सभी रास्ते बंद हो चुके हैं।
श्री चौहान ने यहां संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुये कहा कि कांग्रेस की राजनीति झूठ, भ्रम और मनगढ़ंत कथाओं पर टिकी हुई है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को गांव से समस्या है, काम से समस्या है और राम से भी समस्या है, और यही कांग्रेस की राजनीतिक पहचान बन चुकी है।
श्री चौहान ने लोकसभा की कार्यवाही का उल्लेख करते हुए कहा कि कांग्रेस के पास सच्चाई सुनने का साहस नहीं है। उन्होंने कहा, "मैंने कहा था कि मेरी पूरी बात सुनिए, लेकिन मेरी आवाज दबाने की कोशिश की गई। संसद चर्चा के लिए होती है, व्यवधान के लिए नहीं।"श्री चौहान ने आरोप लगाया कि यूपीए सरकार के समय मननरेगा भ्रष्टाचार का अड्डा बन गया था। उन्होंने कहा कि मजदूरों के नाम पर ठेकेदार काम करते थे, मशीनों से किए गए काम को मजदूरी दिखाया जाता था, एक ही सड़क को हर साल नई बताकर भुगतान लिया जाता था। इतना ही नहीं कई जगह 80 साल के 'मजदूर', फर्जी हाजिरी और झूठे रिकॉर्ड सामने आए। उन्होंने बताया कि ग्राम सभाओं में हुए सोशल ऑडिट के दौरान 10 लाख से अधिक शिकायतें दर्ज की गई थीं।
श्री चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में अब तक 8.48 लाख करोड़ रुपये ग्रामीण विकास पर पारदर्शिता के साथ खर्च किए गए हैं, जबकि यूपीए शासन में यह राशि केवल 2 लाख करोड़ रुपये थी। उन्होंने सवाल उठाया कि इतने खर्च के बावजूद क्या गांवों में स्थायी संपत्तियां बनीं और क्या मजदूरों का जीवन बदला।
श्री चौहान ने कहा कि नई योजना 'विकसित भारत - जी राम जी' मनरेगा से कई कदम आगे है। उन्होंने कहा कि यह भ्रष्टाचार-मुक्त, तकनीक आधारित और मजदूर-केंद्रित योजना है। इसमें 100 दिनों के बजाय 125 दिनों के रोजगार की कानूनी गारंटी दी गई है। काम न मिलने पर बेरोजगारी भत्ता और भुगतान में देरी पर जुर्माने का प्रावधान भी किया गया है। ग्राम पंचायतों को यह अधिकार दिया गया है कि वे अपने गांव में होने वाले कार्य स्वयं तय करें।
श्री चौहान ने कहा कि अब केवल मिट्टी खोदने का काम नहीं, बल्कि जल संरक्षण, सड़कें, स्कूल, आंगनवाड़ी भवन, अस्पताल, खेत तालाब, चेक डैम, एफपीओ ढांचा और आपदा प्रबंधन जैसे ठोस विकास कार्य किए जाएंगे। इस योजना के लिए 1.51 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। प्रशासनिक खर्च 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 9 प्रतिशत किया गया है, ताकि रोजगार सहायकों और तकनीकी कर्मचारियों को समय पर भुगतान हो सके।
श्री चौहान ने कृषि और रोजगार के संतुलन पर बात करते हुए कहा कि ग्रामीण कार्यों की योजना फसल के मौसम को ध्यान में रखकर बनाई जाएगी, ताकि किसानों और मजदूरों-दोनों के हित सुरक्षित रहें।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित