बैतूल , जनवरी 11 -- मनरेगा का नाम बदले जाने को लेकर कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। शनिवार को आयोजित पत्रकार वार्ता में बैतूल कांग्रेस जिलाध्यक्ष एवं पूर्व विधायक निलय डागा ने इसे गरीबों और ग्रामीणों से रोजगार छीनने की साजिश करार दिया। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी की विचारधारा से प्रेरित यह योजना कांग्रेस सरकार द्वारा ग्रामीणों को साल में सौ दिन का रोजगार देने के उद्देश्य से शुरू की गई थी।

निलय डागा ने कहा कि गांधी जी की रोजगार आधारित सोच को दुनिया के करीब 80 देशों ने अपनाया है। इसी विचारधारा के तहत मनरेगा लागू की गई थी, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में काम के साथ सम्मानजनक जीवन सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार इस योजना की आत्मा को ही खत्म करने पर आमादा है।

डागा ने बताया कि पहले मनरेगा के अंतर्गत पेड़ रोपण, बोरी बंधान, जल संरक्षण और ग्रामीण विकास से जुड़े जनहित के कार्य कराए जाते थे। उस समय केंद्र सरकार 90 प्रतिशत और राज्य सरकार 10 प्रतिशत व्यय वहन करती थी, लेकिन अब इसे बदलकर केंद्र का हिस्सा 60 प्रतिशत और राज्य का 40 प्रतिशत कर दिया गया है।

उन्होंने दावा किया कि राज्य सरकार की आर्थिक स्थिति इतनी खराब है कि वह 40 प्रतिशत तो दूर, 10 प्रतिशत हिस्सा भी समय पर देने में असमर्थ है। डागा के अनुसार सरकार हर महीने दो से तीन हजार करोड़ रुपये का कर्ज लेकर काम चला रही है। उन्होंने आशंका जताई कि इसी बहाने सरकार मनरेगा को धीरे-धीरे बंद करने की तैयारी में है।

निलय डागा ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस को योजना के नाम से कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन गरीबों और मजदूरों से रोजगार छीनना किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस महात्मा गांधी के नाम पर राजनीति नहीं करती और न ही उसे किसी नाम से कोई परेशानी है।

राम मंदिर के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि कांग्रेस को राम के नाम से कोई दिक्कत नहीं है। उन्होंने याद दिलाया कि वर्ष 1989 में राम मंदिर का दरवाजा तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने ही खुलवाया था। डागा ने कहा कि गांधी जी ने भी 'हे राम' कहते हुए अपने प्राण त्यागे थे।

इस दौरान उन्होंने पीपीपी मोड पर बनने वाले मेडिकल कॉलेज को लेकर भी सरकार पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि सरकार सरकारी मेडिकल कॉलेज खोलने का दावा कर रही है, जबकि वास्तव में यह निजी कॉलेज होगा। उन्होंने पूछा कि जब कोई कंपनी 450 करोड़ रुपये का निवेश करेगी तो मुफ्त इलाज कैसे संभव होगा। उन्होंने आशंका जताई कि अंततः इसका आर्थिक बोझ जनता पर ही पड़ेगा।

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