चंडीगढ़/फतेहाबाद , जनवरी 24 -- कांग्रेस के आह्वान पर हरियाणा के फतेहाबाद जिले के गांव बनगांव में आयोजित पंचायत-स्तरीय कार्यक्रम में सिरसा की सांसद, कुमारी सैलजा ने भाग लिया। यह कार्यक्रम महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को कमजोर किये जाने के विरोध तथा ग्रामीण गरीबों के काम के संवैधानिक अधिकार की रक्षा के उद्देश्य से आयोजित किया गया। कार्यक्रम में ग्राम पंचायत प्रतिनिधियों, मनरेगा मजदूरों, महिलाओं, युवाओं और ग्रामीणों की बड़ी संख्या में उपस्थिति रही।
कुमारी सैलजा ने अपने संबोधन में कहा कि मनरेगा केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत के करोड़ों परिवारों के लिए जीवनरेखा है। इस योजना ने पिछले दो दशकों में गरीब, मजदूर, किसान और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती दी है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार मनरेगा के स्वरूप में बदलाव कर ग्रामीण मजदूरों के काम मांगने के कानूनी अधिकार, न्यूनतम मजदूरी की गारंटी और ग्राम पंचायतों की भूमिका को कमजोर कर रही है। डिजिटल सत्यापन की जटिलतायें, भुगतान में देरी, बजट में अपेक्षित वृद्धि का अभाव और प्रशासनिक नियंत्रण का केंद्रीकरण मनरेगा की मूल भावना के विपरीत हैं।
उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी जैसे कठिन समय में मनरेगा ने करोड़ों परिवारों को आर्थिक सहारा दिया, लेकिन आज उसी योजना को व्यवस्थित रूप से कमजोर किया जा रहा है। इससे गरीब मजदूरों का काम और सम्मान दोनों प्रभावित हो रहे हैं। पहले ग्राम पंचायतों को गांव के विकास कार्यों की योजना बनाने और मजदूरों को काम देने का अधिकार था, लेकिन अब निर्णय ऊपर से थोपे जा रहे हैं, जिससे पंचायतों की स्वायत्तता समाप्त हो रही है और स्थानीय जरूरतों की अनदेखी हो रही है।
कांग्रेस पार्टी की ओर से उन्होंने मांग की कि काम की कानूनी गारंटी को पूरी तरह बहाल किया जाए, मनरेगा में किए गए प्रतिकूल बदलाव तुरंत वापस लिए जाएं, मजदूरों को समय पर सम्मानजनक न्यूनतम मजदूरी मिले और ग्राम पंचायतों के अधिकार पुनः स्थापित किये जायें। साथ ही मनरेगा का बजट बढ़ाया जाना भी जरूरी है, ताकि जरूरतमंदों को पर्याप्त रोजगार मिल सके।
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