भोपाल , नवंबर 17 -- मध्य प्रदेश में औषधीय पौधों का उत्पादन वर्ष 2024-25 में बढ़ कर लगभग सवा लाख मीट्रिक टन हो गया है।

आधिकारिक जानकारी के अनुसार, मध्य प्रदेश औषधीय फसलों के उत्पादन में देश का अग्रणी राज्य है। देश और विदेश में औषधीय फसलों की बढ़ती मांग के चलते प्रदेश के किसानों ने भी इन फसलों के उत्पादन की ओर ध्यान दिया है। प्रदेश में 46,837 हैक्टेयर क्षेत्र में औषधीय फसलों ईसबगोल, सफेद मूसली, कोलियस और अन्य फसलों की खेती की जा रही है। प्रदेश में वर्ष 2022-23 में 44,324 हैक्टेयर में औषधीय फसलें उगायी गई थी, जो 2024-25 में बढ़कर 46,837 हैक्टेयर हो गई। इन फसलों का वर्ष 2021-22 में उत्पादन 1,06,848 मीट्रिक टन था, जो 2024-25 में बढ़कर 1,24 ,199 मीट्रिक टन हो गया है।

भारत में औषधीय और सुगंधित फसलों के उत्पादन में मध्य प्रदेश की सर्वाधिक भागीदारी है। एक अनुमान के अनुसार देश में औषधीय फसलों का 44 प्रतिशत हिस्सा मध्य प्रदेश में उत्पादित होता है। राज्य सरकार औषधीय पौधों की खेती को बढ़ावा देने के लिए किसानों को अनुदान और अन्य प्रोत्साहन दे रही है।

औषधीय पौधों की खेती से किसानों की आय बढ़ाने एवं रोजगार के अवसर उत्पन्न करने के प्रयास किए जा रहे हैं। राज्य सरकार किसानों को औषधीय पौधों की खेती के लिए 20 प्रतिशत से 50 प्रतिशत तक का अनुदान प्रदान करती है। सरकार पारंपरिक फसलों के अलावा औषधीय पौधों जैसी वाणिज्यिक फसलों पर ध्यान केंद्रित कर रही है, जिससे किसानों को उनकी उपज का अच्छा मूल्य मिल सके। औषधीय पौधों की खेती और संग्रह से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर भी पैदा हो रहे हैं।

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