भोपाल , दिसंबर 17 -- मध्यप्रदेश को विकसित, आत्मनिर्भर और समृद्ध बनाने के विषय पर चर्चा के लिए आज राज्य विधानसभा का एक दिवसीय विशेष सत्र आयोजित हुआ।
सत्र की शुरुआत अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर के उद्बोधन से हुई, जिसके बाद मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने अपने संक्षिप्त संबोधन में अपनी सरकार की उल्लेखनीय सफलताओं का संदर्भ दिया। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सरकार के समक्ष आ रहीं चुनौतियों का जिक्र करते हुए राज्य की जनता के लिए कई गारंटियों की मांग की। विधायकों की ओर से चर्चा की शुरुआत संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने की।
विधानसभा अध्यक्ष श्री तोमर ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि मध्यप्रदेश की पहली विधानसभा की पहली बैठक को 70 साल पूरा होने के उपलक्ष्य में ये विशेष सत्र आयोजित किया गया है। एक नवंबर, 1956 को गठित मध्यप्रदेश की पहली विधानसभा की बैठक 17 दिसंबर 1956 को हुई थी।
उन्होंने बताया कि विधानसभा का आज चौथा विशेष सत्र है, अब तक के इतिहास में राज्य विधानसभा के तीन बार विशेष सत्र बुलाए जा चुके हैं। इसके पहले 1997 में, 2000 में और उसके बाद वर्ष 2015 में ऐसा विशेष सत्र आयोजित हुआ था। राज्य विधानसभा के अब तक चार हजार 499 विधायक रह चुके हैं।
श्री तोमर ने कहा कि पहले विधानसभा अध्यक्ष पंडित कुंजीलाल दुबे ने ये विश्वास जताया था कि भविष्य के देश के गौरव में मध्यप्रदेश का गौरव भी शामिल रहेगा।
मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने विशेष सत्र के संबंध में संकल्प प्रस्तुत किया।
डॉ यादव ने अपने संबोधन में कहा कि ये विशेष सत्र केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि लोकतंत्र के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता है। सालों बीमारू राज्य बने रहने के बाद मध्यप्रदेश को भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने पहले विकासशील और उसके बाद विकसित बनाने की दिशा में काम किया। उन्होंने कहा कि सरकार के पास नेता, नीति और नीयत तीनों हैं और वे मध्यप्रदेश को विकसित बना कर ही दम लेंगे। दो साल में सरकार ने जनता के जीवन को बदलाव लाने के लिए कई ऐतिहासिक फैसले लिए। हालिया 11 दिसंबर को राज्य ने 'लाल सलाम' को 'आखिरी सलाम' कर दिया।
उन्होंने कहा कि राज्य में 1999 में नक्सलियों ने कांग्रेस के एक मंत्री की हत्या कर दी थी, हमारे सदन ने इसका बदला ले लिया। सरकार ने उग्रवाद, टेरर फंडिंग, इंडियन मुजाहिदीन और हथियार फैक्ट्रियों को ध्वस्त करने जैसे कई उल्लेखनीय काम किए हैं।
उन्होंने शिक्षा, महिला सशक्तिकरण जैसे क्षेत्रों में सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए कहा कि लाड़ली बहना योजना की राशि एक हजार रुपए से बढ़ाकर डेढ़ हजार कर दी गई है। सरकार ने अंग्रेजों से उधार लिए हुए कई शब्दों को भी विदा कर दिया गया है। इसके साथ ही उन्होंने कुलपतियों को कुलगुरु का नाम देने के सरकार के निर्णय का भी उल्लेख किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने जिस प्रकार 2025 को उद्योग वर्ष के तौर पर मनाने का निर्णय किया था, उसी प्रकार अब 2026 को कृषि वर्ष घोषित करने का फैसला किया है। देहदान करने वाले लोगों को सरकार ने 'गॉर्ड ऑफ ऑनर' देने की परंपरा स्थापित की है, ताकि अधिक से अधिक लोग इस ओर प्रेरित हो सकें। सरकार कई ऐसे छोटे-छोटे निर्णय ले रही है, जो लोगों के जीवन से जुड़े हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार अप्रैल 2026 से बस परिवहन सेवा शुरु करने वाली है।
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि जनता को वर्ष 2026 के पहले कई गारंटियां चाहिए, जिनमें सोयाबीन और धान की एमएसपी, ओबीसी को 27 प्रतिशत आरक्षण, खाद संकट दूर होना और 24 घंटे बिजली शामिल है।
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