भोपाल , मार्च 8 -- राज्यसभा सांसद एवं मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने प्रदेश के बासमती उत्पादक किसानों के साथ हो रहे कथित अन्याय को समाप्त करते हुए 14 जिलों में उत्पादित बासमती चावल को तत्काल भौगोलिक संकेतक (जीआई) टैग देने की मांग की है।

श्री सिंह ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर कहा है कि पिछले कई वर्षों से मध्यप्रदेश के किसान यह मांग कर रहे हैं कि प्रदेश के 14 जिलों में उत्पादित बासमती चावल को जीआई टैग दिया जाए, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है, जिससे किसानों को अपने उत्पाद का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2013 में तत्कालीन केंद्र सरकार ने मध्यप्रदेश के बासमती चावल को जीआई टैग प्रदान किया था, लेकिन वर्ष 2016 में वर्तमान केंद्र सरकार ने इसे वापस ले लिया। वर्तमान में जम्मू-कश्मीर, पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड, उत्तरप्रदेश और दिल्ली के बासमती चावल को जीआई टैग प्राप्त है, जबकि मध्यप्रदेश के किसानों को इससे वंचित रखा गया है।

श्री सिंह ने आरोप लगाया कि अन्य राज्यों के मिल मालिकों और व्यापारिक लॉबी के दबाव के कारण मध्यप्रदेश के किसानों के साथ भेदभाव किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में उत्पादित बासमती चावल को औने-पौने दाम में खरीदकर अन्य राज्यों के जीआई टैग के नाम पर विदेशों में निर्यात किया जा रहा है, जिससे कंपनियां और व्यापारी लाभ कमा रहे हैं, जबकि किसानों को इसका उचित लाभ नहीं मिल रहा है।

उन्होंने बताया कि ग्वालियर-चंबल से लेकर मालवा और महाकौशल क्षेत्र तक लगभग 14 जिलों-श्योपुर, मुरैना, भिंड, ग्वालियर, शिवपुरी, दतिया, गुना, विदिशा, रायसेन, सीहोर, हरदा, होशंगाबाद, नरसिंहपुर और जबलपुर-में हजारों किसान वर्षों से उच्च गुणवत्ता वाले सुगंधित बासमती चावल का उत्पादन कर रहे हैं।

श्री सिंह ने कहा कि मध्यप्रदेश में बासमती चावल की खेती की परंपरा 100 वर्ष से अधिक पुरानी है और अंग्रेजी शासनकाल के गजेटियर में भी इसका उल्लेख मिलता है। प्रदेश की जलवायु और मिट्टी की गुणवत्ता के कारण यहां उत्पादित बासमती चावल की सुगंध और गुणवत्ता अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना चुकी है तथा अमेरिका, कनाडा, यूरोप और मध्य-पूर्व के देशों में इसकी मांग है।

उन्होंने कहा कि जहां भारत में मध्यप्रदेश के किसानों को जीआई टैग से वंचित रखा जा रहा है, वहीं पड़ोसी देश पाकिस्तान ने अपने बासमती चावल के जीआई टैग वाले जिलों की संख्या 14 से बढ़ाकर 48 कर दी है और वर्ष 2030 तक 21 अरब अमेरिकी डॉलर के निर्यात लक्ष्य पर काम कर रहा है।

श्री सिंह ने प्रधानमंत्री से आग्रह किया है कि एपीडा में बैठे उन अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए, जो मध्यप्रदेश के किसानों के हितों के विरुद्ध काम कर रहे हैं, तथा प्रदेश के 14 जिलों में उत्पादित बासमती चावल को तत्काल जीआई टैग प्रदान किया जाए, ताकि किसानों को उनके उत्पाद का उचित मूल्य मिल सके।

श्री सिंह ने कहा कि यदि सरकार ने पूसा बासमती चावल को जीआई टैग नहीं दिया तो वह मजबूर होकर अनशन पर बैठेंगे। उन्होंने इसके लिए एपीडा, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और केन्द्रीय कृषि मंत्री को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने आरोप लगाया कि एपीडा ने ऑर्गेनिक कपास के मामले में भी गलत कार्य किए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को इस मामले में निर्णय लेने के लिए जून तक का समय दिया गया है।

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