चेन्नई , फरवरी 11 -- मद्रास उच्च न्यायालय ने बुधवार को तमिलनाडु प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (टीएनपीसीबी) और अन्य प्रतिवादियों को वेदांता लिमिटेड की उस रिट याचिका पर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया, जिसमें थूथुकुडी जिले में स्टरलाइट परिसर में प्रस्तावित 'ग्रीन कॉपर' परियोजना के लिए आवेदन खारिज किये जाने को चुनौती दी गयी है।

न्यायालय ने इस प्रस्ताव के अध्ययन के लिए विशेषज्ञ समिति गठित करने पर राज्य सरकार के रुख को भी स्पष्ट करने को कहा। मुख्य न्यायाधीश मणिन्द्र मोहन श्रीवास्तव और न्यायमूर्ति अरुल मुरुगन की प्रथम पीठ, टीएनपीसीबी द्वारा 'परिचालन के लिए मंजूरी' (सीटीओ) देने से इनकार किये जाने को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई कर रही थी। पीठ ने अतिरिक्त महाधिवक्ता जे. रविन्द्रन को निर्देश दिया कि वे 26 फरवरी तक विशेषज्ञ समिति गठित करने के संबंध में राज्य सरकार का पक्ष लेकर न्यायालय को अवगत कराये।

याचिका में कहा गया है कि वेदांता ने नौ जनवरी को टीएनपीसीबी के समक्ष सीटीओ के लिए आवेदन किया था, जिसे बोर्ड ने 27 जनवरी को खारिज कर दिया। इसके बाद कंपनी ने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। वेदांता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता सतीश पराशरण ने दलील दी कि प्रस्तावित 'ग्रीन कॉपर' परियोजना और पूर्व में संचालित स्मेल्टर (गलाने वाले) संयंत्र की प्रक्रिया में मौलिक अंतर है, जिसे नजरअंदाज करते हुए आवेदन को 'यांत्रिक ढंग' से खारिज किया गया। उन्होंने कहा कि नये प्रस्ताव का कोई वैज्ञानिक या तकनीकी मूल्यांकन नहीं किया गया और कंपनी को इसके लाभ और सतत स्वरूप को स्पष्ट करने का अवसर नहीं दिया गया।

कंपनी ने न्यायालय को बताया कि 'ग्रीन कॉपर' परियोजना एक हाइब्रिड उत्पादन मॉडल पर आधारित है, जिसमें 70 प्रतिशत प्राथमिक तांबा और 30 प्रतिशत रिसाइकल किया हुआ तांबा उपयोग किया जायेगा। इसमें अत्याधुनिक उत्सर्जन नियंत्रण प्रणालियों का इस्तेमाल प्रस्तावित है, जो वैश्विक मानकों से बेहतर होंगी तथा प्रदूषण कम करने, अपशिष्ट न्यूनतम रखने और जल एवं ऊर्जा दक्षता बढ़ाने में सहायक होंगी। इसके अलावा संयंत्र को 'नेट वॉटर-पॉजिटिव' बनाने की रूपरेखा भी प्रस्तुत की गयी है।

वेदांता ने यह भी कहा कि परियोजना केंद्रीय खान मंत्रालय के 'कॉपर विजन' के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य देश में घरेलू तांबा उत्पादन को बढ़ावा देना है, खासकर इलेक्ट्रिक वाहन और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों की बढ़ती मांग को देखते हुए। कंपनी ने यह भी रेखांकित किया कि स्टरलाइट संयंत्र के बंद होने से पहले भारत तांबे का निर्यातक था, लेकिन उसके बाद देश शुद्ध आयातक बन गया है।

कंपनी ने उच्च न्यायालय से आग्रह किया कि न्यायालय की निगरानी में एक स्वतंत्र बहुविषयक विशेषज्ञ समिति गठित की जाये, जिसमें पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और खान मंत्रालय के विशेषज्ञ शामिल हों ताकि प्रस्ताव का वैज्ञानिक आकलन किया जा सके।

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