भोपाल , अप्रैल 13 -- जमीयत उलमा मध्यप्रदेश के अध्यक्ष हाजी मोहम्मद हारून ने मदरसे के छात्रों को चाइल्ड लाइन को सौंपे जाने की घटना की निंदा करते हुए पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
जारी बयान में उन्होंने कहा कि हाल ही में बिहार से महाराष्ट्र के लातूर जिले में स्थित एक मदरसे में शिक्षा प्राप्त करने जा रहे छात्रों को कटनी रेलवे स्टेशन पर आरपीएफ, जीआरपी और बाल कल्याण समिति की संयुक्त टीम ने रोक लिया। साथ ही उनके साथ जा रहे शिक्षकों को हिरासत में लेकर बच्चों को जबलपुर बाल गृह भेज दिया गया।
उन्होंने कहा कि प्रशासन द्वारा इस कार्रवाई को मानव तस्करी से जोड़कर प्रस्तुत करना बिना जांच के गंभीर आरोप लगाने जैसा है, जो गैर-जिम्मेदाराना रवैये को दर्शाता है। उनके अनुसार संबंधित बच्चे अपने माता-पिता की सहमति से शिक्षा के उद्देश्य से यात्रा कर रहे थे।
हाजी हारून ने कहा कि देश में विभिन्न स्थानों पर शिक्षा के लिए छात्रों का आना-जाना सामान्य प्रक्रिया है, लेकिन केवल मदरसे के छात्रों को रोककर कार्रवाई करना अनुचित है। उन्होंने इसे धार्मिक शिक्षा में हस्तक्षेप करार देते हुए कड़ी आपत्ति जताई।
उन्होंने यह भी कहा कि बाल संरक्षण संस्थाओं को सड़कों पर रहने वाले और असहाय बच्चों की ओर अधिक ध्यान देना चाहिए, जबकि वर्तमान मामले में वैध दस्तावेजों के साथ यात्रा कर रहे छात्रों को रोका गया। उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और पुलिस महानिदेशक से मांग की कि इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच कराई जाए तथा जिम्मेदार अधिकारियों पर उचित कार्रवाई की जाए।
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