लखनऊ , जनवरी 10 -- समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने चुनाव आयोग द्वारा जारी की गयी विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की मसौदा सूची की विश्वनीयता पर एक बार फिर सवाल उठाते हुये आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार साजिश के तहत पीडीए समाज के वोट काटने और अपना वोट बढ़ाने का निर्देश दे रही है।

श्री यादव ने शनिवार को यहां एक प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि भाजपा सरकार वोटर लिस्ट में हेराफेरी की तैयारी कर रही है। भाजपा के लोग मतदाता सूची अपने हिसाब से बनाना चाहते है। भाजपा सरकार साजिश और षडयंत्र के तहत पीडीए समाज का वोट काटने और अपना वोट बढ़ाने का निर्देश दे रही है।

उन्होने कहा कि समाजवादी पार्टी ने अपने सभी बीएलए और बूथ प्रहरियों को एक प्रारूप उपलब्ध कराया है। जो भी फर्जी और डुप्लीकेट मतदाता बनवाता दिखाई दे, उसके खिलाफ एफआईआर करायेंगे। एफआईआर का पूरा प्रारूप तैयार कराया गया है, उसमें केवल नाम डाल कर एफआईआर कर देनी है।

श्री यादव ने कहा कि जब एसआईआर की इतनी बड़ी प्रक्रिया चल रही है तो वोटरलिस्ट में केवल वास्तविक वोटरों का ही नाम होना चाहिए। उन्हीं का वोट बनना चाहिए लेकिन देखा जा रहा है कि राज्य निर्वाचन आयोग की मतदाता सूची और केन्द्रीय चुनाव आयोग की मतदाता सूची में करोड़ो वोटों का अंतर आ रहा है। जबकि दो मतदाता सूची तैयार करने वाले बीएलओ और अधिकारी एक ही है।

उन्होने कहा कि जब मतदाता वही है अधिकारी और बीएलओ वही है तो राज्य और केन्द्रीय चुनाव आयोग की मतदाता सूचियों में इतना अंतर क्यों है, कहां कमियां है। चुनाव आयोग को बताना चाहिए सही कौन सूची है। उम्म्मीद है कि चुनाव आयोग इन सभी सवालों का जवाब देगा।

श्री यादव ने कहा कि मतदाता सूची को आधार कार्ड से जोड़ा जाना चाहिए और आधार कार्ड मेटल का बनाया जाय जिसमें फर्जीवाड़ा न हो पाये। उन्होने कहा कि जानकारी मिली है कि 1.93 करोड़ वोटरों की मैपिंग हो जाने के बाद उन्हें अब अनमैप्ड कर दिया गया है। यह बेहद गंभीर मामला है कि एक बार मैपिंग के बाद लगभग दो करोड़ वोट फिर अनमैप्ड किये जा रहे है। बताया जा रहा है कि उसमें कोई एरर (त्रुटि) हुई है। यह एरर नहीं है भाजपा के लिए एरर किया गया है। भाजपा जानबूझकर गलती कराती है जिससे लोग उलझ जायें। अगर मैपिंग के बाद फिर से अनमैप्ड किया गया है तो बहुत गंभीर सवाल है। अब इनको बीएलओ के माध्यम से नोटिस भेजकर जांच की जायेगी। इस तरह से कुल तीन करोड़ मतदाताओं को नोटिस भेजा जा रहा है। पहले बताया गया था कि मैपिंग वाले मतदाताओं को कोई नोटिस नहीं जायेगी।

सपा प्रमुख ने कहा कि फिर सवाल उठ रहा है कि यह मैपिंग एप किसका है। चुनाव आयोग बताएं कि एप किसका बनाया हुआ है? आयोग को कौन तकनीकी सपोर्ट दे रहा है? आयोग विपक्ष को बताए कि एप किसका है? अगर एप उस कम्पनी का है, जिसने भाजपा को इलेक्टोरल बांड से चंदा दिया है तो यह बड़ा सवाल खड़ा होता है। अगर भाजपा को चंदा देनी वाली कम्पनी मैपिंग कर रही है वही डेटा मैनेजमेंट कर रही है इसका मतलब है लाखों वोट डिलीट कर विपक्ष को उलझाए रखने की साजिश है।

श्री यादव ने कहा कि भाजपा मुद्दों से नहीं जीत सकती है। वहां वोटो की हेराफेरी कर प्रशासन के माध्यम से उत्तर प्रदेश के चुनाव को प्रभावित करने की तैयारी हो रही है। यह भी सुनने में आ रहा है कि भाजपा की विचारधारा से जुड़े अधिकारियों को जिलों में सुनवाई (हियरिंग) के लिए लगाया गया है। हमारी मांग है कि ऐसे अधिकारियों के बारे में बताया जाय। पहले भी देखा गया भाजपा सरकार चुनाव में जाति के आधार पर अधिकारियों की तैनाती करती है।

उन्होने कहा कि भाजपा दबाव डालकर विपक्ष के वोट डिलीट कराना चाहती है और पहले जो फर्जी और डबल, ट्रिपल वोट था वो वोट दोबारा जोड़ना चाहती है। इसलिए सभी बीएलए को एफआईआर कराने के लिए प्रारूप उपलब्ध कराया जा रहा है। श्री यादव ने मांग की कि जिलों में मतदाताओं की सुनवाई राजनीतिक दलों के बीएलए की मौजूदगी में हो और हियरिंग के फैसले के बाद सूची नोटिस बोर्ड पर लगायी जाये, जिसको मतदाता और सभी दलों के लोग देख सकें। जिलों में भेजे गए अधिकारियों का मोबाइल नम्बर दिया जाए जिससे उनसे सम्पर्क किया जा सके।

श्री यादव ने कहा चुनाव आयोग की कार्यशैली पर इससे पहले भी कई बार सवाल उठे है। समाजवादी पार्टी ने रामपुर में उपचुनाव में वीडियो डाले थे जिसमें पुलिस वोटरों को रोक रही है लेकिन किसी पुलिस और अधिकारी पर कार्रवाई नहीं हुई। विधानसभा उपचुनाव में उपचुनाव कैसे हुआ था सभी ने देखा था। कुन्दरकी, मीरापुर, कटेहरी में पुलिस के लोगों ने सादी-वर्दी में वोट-डाले। शिकायत के बाद भी किसी पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।

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