इंफाल , जनवरी 12 -- मणिपुर में आंतरिक रूप से विस्थापित लोगों (आईडीपी) ने अपनी लंबित समस्याओं के समाधान में राज्य प्रशासन की कथित निष्क्रियता के विरोध में सोमवार को प्रदर्शन किया। बाद में प्रदर्शनकारियों ने राज्यपाल के. भल्ला से मुलाकात कर अपनी मांगों से उन्हें अवगत कराया।
राज्य सरकार ने यह घोषणा की थी कि सभी आईडीपी 31 दिसंबर 2025 तक अपने घरों में लौट सकेंगे, लेकिन विस्थापितों का कहना है कि वे अब तक घर वापसी नहीं कर पा रहे हैं। जब विस्थापित लोग (आईडीपी) लोक भवन की ओर मार्च करने लगे, तो पुलिस ने उन्हें रोक दिया। इसके बाद 11 सदस्यों के एक प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल से मुलाकात की।
आईडीपी ने राज्यपाल को बताया कि वे 3 मई 2023 से चुराचांदपुर जिले में हिंसा शुरू होने के बाद से राहत शिविरों में रह रहे हैं और लगातार कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वे पहले भी ज्ञापन सौंप चुके हैं, लेकिन अब तक कोई जवाब नहीं मिला।
इस पर राज्यपाल ने उन्हें आश्वासन दिया कि वह उनकी मांगों पर मंगलवार तक उचित जवाब देंगे। राज्यपाल ने यह भी भरोसा दिलाया कि संकट के बाद मणिपुर में किसी भी जातीय आधार पर लोगों को अलग करने के लिए कोई "बफर ज़ोन" मौजूद नहीं है।
आईडीपी ने कहा कि राज्य प्रशासन की ओर से प्रतिक्रिया न मिलने के कारण उन्हें मार्च निकालने के लिए मजबूर होना पड़ा। राज्य के विभिन्न हिस्सों में स्थित राहत शिविरों और इलाकों से आए विस्थापित लोग इस मार्च में शामिल हुए।
कोऑर्डिनेटिंग कमेटी ऑन मणिपुर इंटीग्रिटी (सीओसीओएमआई) के संयोजक अथौबा ने कहा कि राज्यपाल के जवाब के बाद आगे की रणनीति पर निर्णय लिया जाएगा।
प्रदर्शनकारियों को राजभवन तक पहुंचने से रोकने के लिए कड़े सुरक्षा इंतजाम किए गए थे। कीसमपत जंक्शन समेत प्रमुख स्थानों पर रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ), केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) और मणिपुर पुलिस की तैनाती की गई। एहतियातन राज्यपाल के आवास की ओर जाने वाली सड़कों को अवरुद्ध कर दिया गया।
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