इंफाल , दिसंबर 27 -- मणिपुर सरकार में पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन निदेशालय ने पूरे राज्य में 1000 से ज्यादा झरने विकसित किये हैं। वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के राज्य मुख्य सचिव अरुण कुमार सिन्हा ने शनिवार को यह जानकारी दी।

श्री सिन्हा ने बताया कि इनमें से 173 जरूरी झरनों को उखरुल और नोनी जिलों में एक पायलट स्कीम के तहत पुनर्जीवित किया गया है। उन्होंने यहां एक कार्यक्रम में कहा कि एक सुरक्षित भविष्य बनाने के लिये अब बातों को अमली जामा पहनाने का समय आ गया है। उन्होंने कहा कि ये प्रयास आने वाली पीढ़ियों के हितों की रक्षा के लिये किये जा रहे हैं।

श्री सिन्हा ने कहा कि जहां सरकार कई तरह की पहल कर रही है, वहीं मीडिया के लिये भी यह उतना ही ज़रूरी है कि वह लोगों को पानी के स्रोतों, जंगलों और ग्रह पर जीवन बनाये रखने के लिये ज़रूरी अन्य प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में आने वाली चुनौतियों के बारे में जानकारी दे। उन्होंने मीडिया से मौजूदा खतरों, चुनौतियों और सरकार द्वारा उठाये जा रहे कदमों के बारे में जानकारी फैलाने का आग्रह किया।

उन्होंने कहा कि पहाड़ी इलाकों में झरनों का प्रबंधन खास तौर पर महत्वपूर्ण है, क्योंकि वनों की कटाई और अवैज्ञानिक भूमि उपयोग के कारण कई झरने सूख रहे हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने देश भर में झरनों के प्रबंधन के लिये 2,700 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया है।

उन्होंने शिमला की मिसाल देते हुए कहा कि इस शहर को मूल रूप से औपनिवेशिक काल के दौरान लगभग 20,000 की आबादी के लिये प्लान किया गया था, लेकिन अब यहां की आबादी बढ़कर दो लाख से ज़्यादा हो गयी है। इससे यह क्षेत्र पर्यावरण की दृष्टि से अस्थिर हो गया है। उत्तराखंड में भी तेज़ी से विकास के कारण इसी तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

श्री सिन्हा ने मणिपुर का ज़िक्र करते हुए कहा कि सड़क निर्माण और झरनों के सूखने के कारण भूस्खलन और पानी की कमी बड़ी समस्या बन गयी है। उन्होंने कहा कि विभाग ने पहले ही इम्फाल नदी के कायाकल्प का काम शुरू कर दिया है। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि यह सुनिश्चित करने के लिए सामूहिक ज़िम्मेदारी ज़रूरी है कि प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण किया जाये।

विभाग ने राज्य में लगभग 71 आर्द्रभूमियों का विकास किया है, जिनमें से तीन आर्द्रभूमियों को आधिकारिक तौर पर अधिसूचित किया गया है और चार में वर्तमान में कायाकल्प का काम चल रहा है। उन्होंने कहा कि आर्द्रभूमि संरक्षण गतिविधियां भी सक्रिय रूप से की जा रही हैं। मणिपुर सरकार में पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन के निदेशक डॉ. टी. ब्रजकुमार सिंह ने समारोह की अध्यक्षता की।

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