नई दिल्ली , जनवरी 14 -- पीएचडी वाणिज्य उद्योग मंडल की सहकारिता क्षेत्र समिति के चेयरमैन दिलीपभाई संघानी ने सहकारिता क्षेत्र में सुधार और परदर्शिता के साथ संस्थाओं को मजबूत बनाने पर बल दिया है ताकि यह क्षेत्र 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य में प्रभावी योगदान दे सके।
उद्योग मंडल द्वारा बुधवार को यहां पीएचडी हाउस में "2047 में विकसित भारत के लिए प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों (पैक्स) के नेतृत्व वाली स्मार्ट कोऑपरेटिव बनाने" पर रार्ष्टीय सहकारिता क्षेत्र कार्यशाला में श्री संघानी ने कहा कि पैक्स को पेशेवराना संचालन व्यवस्था, डिजिटल प्रौद्योकी से सशक्त, बहुद्येशीय संस्थाओं के रूप में विकसित किया जा सकता है। इस तरह से सशक्त की गयी ये संस्थाएं प्राथमिक स्तर पर पर कर्ज, सेवा, मूल्य संवर्धन , भंडारण , विपणन और संपर्क कड़ी की मजबूत सुविधाएं दे सकती हैं।
उन्होंने सहकारी संस्थाओं में पारदर्शिता , लोकतांत्रिक तरीके से परिचालन और सरकार, सहकारी इकाइयों तथा उद्योग क्षेत्र के बीच समन्वय के महत्व पर ज़ोर दिया ताकि सहकारी क्षेत्र विकसित भारत के राष्ट्रीय लक्ष्य में असरदार तरीके से योगदान दे सके। उन्होंने कहा कि केंद्र में सहकारिता मंत्रालय की स्थापना से इस क्षेत्र को सशक्त करने की एक संस्थागत व्यवस्था बन चुकी है।
कार्यशाला में नीति निर्माताओं, सहकारी क्षेत्र के नेताओं और हितधारकों को एक साथ लाया गया है ताकि भारत के देश में सहाकारिता आंदोलन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ के तौर पर पैक्स को मजबूत करने पर विचार-विमर्श किया जा सके। इस कार्यशाला में कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) के सचिव डॉ. सुधांशु, नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज़ लि के प्रबंध निदेशक प्रकाश नाइकनवरे, पीएचडी के सीईओ और महासचिव डॉ. रणजीत मेहता और उप महासचिव डॉ. जतिंदर सिंह के अलावा देश भर से आमंत्रित सहकारिता क्षेत्र के नेता और पैक्स के प्रतिनिधि शामिल हुए।
एपीडा के डॉ. सुधांशु ने कहा कि पैक्स को मज़बूत किए बिना 2047 तक एक विकसित भारत की कल्पना नहीं की जा सकती, क्योंकि वे ग्रामीण और कृषि प्रधान भारत का आधार हैं। उन्होंने पैक्स को बहुधंधी, प्रौद्योगिकी से सम्पन्न संस्थान में बदलने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया।
श्री नाइकनवरे ने बताया कि कैसे पैक्स कर्ज देने वाली संस्थाओं से उभर कर अब विविध प्रकार की सेवाएं दे रहे ग्रामीण व्यवसायिक केंद्र बन रही हैं, जिससे ग्रामीण सप्लाई चेन मजबूत हो रही हैं और उद्यमिता को बढ़ावा मिल रहा है। कोऑपरेटिव चीनी मिल क्षेत्र का उदाहरण देते उन्होंने बताया कि कैसे पक्की खरीद, समय पर भुगतान , अवसंरचना विकास और पैक के साथ समन्वय ने किसानों की आय में बढ़ोतरी की है और पैक्स की वित्तीय स्थितिको मजबूत किया है।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित