बैतूल , फरवरी 04 -- मध्यप्रदेश के बैतूल जिले के कई मजदूरों के रोजी-रोटी की तलाश में उड़ीसा जाने और वहां महीनों काम करने के बाद भी एक भी पैसा नहीं मिलने का मामला सामने आया है।

जिले के 40 से अधिक मजदूर कल न्याय की उम्मीद लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे। महीनों की मेहनत के बाद भी उन्हें मेहनताना नहीं मिला और अब उनके घरों में चूल्हा जलना मुश्किल हो गया है। मजदूरों ने कलेक्टर से गुहार लगाई कि दोषी ठेकेदारों पर कार्रवाई हो और उनकी बकाया मजदूरी जल्द दिलाई जाए।

मजदूरों ने बताया कि सारणी क्षेत्र के दो ठेकेदारों ने सितंबर माह में उन्हें उड़ीसा के अंगुल जिले में निर्माणाधीन पावर प्लांट में काम दिलाने का भरोसा दिया था। प्रतिदिन 1000 रुपये मजदूरी, रहने-खाने की सुविधा और समय पर भुगतान का आश्वासन मिला। इन वादों पर भरोसा कर मजदूर नागपुर होते हुए अंगुल पहुंचे, जहां उनसे 17 से 18 घंटे तक लगातार कठोर श्रम करवाया गया।

काम पूरा होने के बाद जब मजदूरों ने अपनी मजदूरी मांगी तो उन्हें "बिल पास होने के बाद भुगतान" का बहाना बनाकर गांव लौटा दिया गया। महीनों बीत जाने के बावजूद अब तक एक भी रुपया नहीं मिला है। मजदूरों का कहना है कि कुल बकाया राशि करीब 11 लाख रुपये है। आरोप है कि दोबारा मांग करने पर ठेकेदारों ने अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया और भुगतान से साफ इनकार कर दिया।

सभी पीड़ित मजदूर आदिवासी समुदाय से हैं। पीड़ितों ने प्रशासन से मांग की है कि ठेकेदारों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए और उन्हें उनका मेहनताना दिलाया जाए।

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