दरभंगा, मार्च 23 -- भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली के कृषि अभियांत्रिकी उप महानिदेशक डॉ. श्याम नारायण झा ने सोमवार को कहा कि भारत की पहचान बन चुके मखाना को वैश्विक बाजार में मजबूत और विशिष्ट स्थान दिलाने के लिए इससे जुड़े किसानों और युवाओं को उत्पादन के साथ-साथ प्रसंस्करण, मूल्य वर्धन और निर्यात के क्षेत्र में भी कृषि अभियांत्रिकी के साथ आगे बढ़ना होगा।
डॉ. झा ने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के राष्ट्रीय मखाना अनुसंधान केंद्र परिसर में मखाना उद्यमिता केंद्र के उद्घाटन के अवसर पर आयोजित कृषक-वैज्ञानिक संवाद कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक वैज्ञानिक अभियांत्रिकी के समन्वय से दरभंगा और पूरे मिथिला क्षेत्र में मखाना की खेती आर्थिक समृद्धि का सशक्त माध्यम बन चुकी है।उन्होंने कहा कि यदि प्रखंड और पंचायत स्तर पर कृषि अभियांत्रिकी अधिकारियों की नियुक्ति की जाए तो कृषि क्षेत्र में विकास की अपार संभावनाएं खुल सकती हैं।
डॉ. झा ने बिहार सरकार से कृषि अभियांत्रिकी निदेशालय की स्थापना और पंचायत स्तर पर इसके प्रतिनिधियों की प्रतिनियुक्ति की आवश्यकता बताते हुए कहा कि कृषि क्षेत्र में अब नए तौर-तरीकों को अपनाने की जरूरत है।उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा बार-बार पत्राचार के बावजूद बिहार सरकार की ओर से अभी तक कोई समुचित पहल नहीं की गई है, जबकि देश के कई अन्य राज्यों में कृषि अभियांत्रिकी निदेशालय पहले से कार्यरत हैं या इसे शुरू करने की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस निदेशालय की स्थापना से न केवल मखाना बल्कि समग्र कृषि विकास में मशीनीकरण को बढ़ावा मिलेगा।
राष्ट्रीय मखाना अनुसंधान केंद्र, दरभंगा के निदेशक डॉ. नचिकेत कोतवाली वाले ने कहा कि केंद्र को राष्ट्रीय दर्जा मिलने के बाद अनुसंधान और प्रसार कार्यक्रमों में तेजी आई है। अब यहां मखाना के साथ-साथ कमल, सिंघाड़ा, मछली और अन्य जलीय फसलों पर भी अनुसंधान किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मखाना प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन के लिए चलाए जा रहे प्रशिक्षण कार्यक्रमों तथा उद्यमिता को बढ़ावा मिलने से हजारों किसान और उद्यमी लाभान्वित हुए हैं। केंद्र के शोध और प्रसार प्रयासों ने मखाना के देशव्यापी विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
डॉ. नचिकेत ने बताया कि पिछले एक दशक में मखाना का क्षेत्रफल 13 हजार हेक्टेयर से बढ़कर लगभग 40 हजार हेक्टेयर हो गया है और अब यह बिहार के बाहर कई राज्यों में भी फैल चुका है। इसी केंद्र से मखाना की पहली उन्नत किस्म 'स्वर्ण वैदेही' विकसित की गई है, जिसकी उत्पादन क्षमता 30 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित