लखनऊ , फरवरी 18 -- राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने हिन्दू एकता पर बल देते हुये कहा कि मंदिर, कुएं और श्मशान सभी हिंदुओं के लिए खुले होने चाहिए, इनमें किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं होना चाहिए।

लखनऊ के निराला नगर स्थित सरस्वती विद्या मंदिर के माधव सभागार में मंगलवार देर शाम आयोजित कार्यकर्ता कुटुंब मिलन कार्यक्रम को संबोधित करते हुये उन्होने कहा कि बच्चों को यह समझाना होगा कि करियर का अर्थ केवल पैसा कमाना और उपभोग करना नहीं है। असली करियर वह है, जिसमें व्यक्ति समाज और देश के लिए कुछ कर सके। उन्होंने कहा कि शिक्षा ऐसी होनी चाहिए, जिससे बच्चे अमीर बनकर दान देना और दूसरों के लिए जीना सीखें। विद्या और धन देश के हित में अर्जित किए जाने चाहिए और बच्चों में यह संस्कार विकसित हों कि राष्ट्र सर्वोपरि है।

डॉ. भागवत ने कहा कि संघ पूरे हिंदू समाज को एक मानता है और सामाजिक समरसता भाषणों से नहीं, बल्कि व्यवहार से आती है। इसके लिए व्यक्तिगत और पारिवारिक स्तर पर मेलजोल बढ़ाना होगा। उन्होंने कहा कि संघ के कुटुंब में जाति-पाति का कोई स्थान नहीं है और यही भाव समाज में भी स्थापित करना होगा।

उन्होंने कहा कि समाज की मूल इकाई व्यक्ति नहीं, बल्कि परिवार है। सामाजिक व्यवहार की पहली पाठशाला परिवार ही होता है। बच्चों में मातृभाषा का ज्ञान, देशभक्ति, ईमानदारी, अनुशासन और कुटुंब गौरव का भाव विकसित करना आवश्यक है। साथ ही तकनीक के उपयोग पर नियंत्रण की आवश्यकता बताते हुए उन्होंने कहा कि स्क्रीन टाइम तय होना चाहिए और नई पीढ़ी को इसके दुष्प्रभावों से अवगत कराना होगा।

सरसंघचालक ने कहा कि हिंदुस्तान एक हिंदू राष्ट्र है और सभी हिंदू आपस में सहोदर हैं। संघ कार्यकर्ताओं को समाज के उन वर्गों तक भी पहुंचना चाहिए, जो अभी संघ के निकट नहीं हैं, और उनसे आत्मीय संबंध स्थापित करने चाहिए। उन्होंने कहा कि संघ चिरतरुण संगठन है और आज देश के सबसे अधिक युवा संघ से जुड़े हुए हैं, जो भारत की शक्ति का प्रतीक है।

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