लखनऊ , नवम्बर 10 -- विभाग के चार अधिकारियों की बर्खास्तगी के बाद समाज कल्याण मंत्री असीम अरुण ने जनता से भी अपील की है कि यदि कहीं भ्रष्टाचार या घूसखोरी की घटना दिखे, तो तुरंत विभागीय शिकायत पोर्टल या जिलाधिकारी कार्यालय में जानकारी दें।
उन्होने कहा कि समाज कल्याण विभाग जनता की सेवा से जुड़ा सबसे संवेदनशील विभाग है, ऐसे में पारदर्शिता और ईमानदारी सर्वोपरि है। "समाज कल्याण योजनाओं का पैसा जनता का है। इसे किसी भी कीमत पर भ्रष्टाचार की भेंट नहीं चढ़ने दिया जाएगा।"मंत्री ने कहा कि समाज कल्याण विभाग की योजनाएँ गरीब, असहाय, दिव्यांग, छात्रवृत्ति प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों और पेंशनधारकों के हित के लिए चलाई जाती हैं। ऐसे में यदि कोई अधिकारी या कर्मचारी जनता के हक पर चोट करने की कोशिश करेगा, तो उसके खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने बताया कि विभागीय स्तर पर निगरानी तंत्र को और मज़बूत किया जा रहा है, ताकि किसी भी अनियमितता या भ्रष्टाचार की शिकायत पर तुरंत कार्रवाई हो सके। मंत्री ने यह भी कहा कि जिन अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध पाई जाएगी, उनके खिलाफ निलंबन से लेकर बर्खास्तगी तक की कार्रवाई की जाएगी।
असीम अरुण ने कहा कि समाज कल्याण योजनाओं का उद्देश्य जन-सेवा है, न कि व्यक्तिगत लाभ। उन्होंने सभी जिलाधिकारियों और समाज कल्याण अधिकारियों को निर्देशित किया कि योजनाओं के लाभार्थियों का चयन पूरी पारदर्शिता के साथ किया जाए और किसी भी प्रकार की मध्यस्थता या घूसखोरी की शिकायत पर तत्काल संज्ञान लिया जाए।
गौरतलब है कि एक दिन पूर्व भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस के तहत अब समाज कल्याण विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। विभाग ने चार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की है और उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया है। इसी के साथ तीन सेवानिवृत्त अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई करते हुए, उनकी पेंशन में कटौती करने का फैसला लिया है। ये कार्रवाई श्रावस्ती, मथुरा, शाहजहांपुर और औरैया जनपदों में हुए घोटालों पर की गई है।
कार्रवाई की जद में आई श्रावस्ती में तैनात अधिकारी मीना श्रीवास्तव पर मुख्यमंत्री महामाया गरीब आर्थिक मदद योजना और छात्र वृत्ति में अनियमितता के आरोप लगे हैं। इसी के साथ खातों में हेरफेर और धनराशि के दुरुपयोग के भी आरोप लगे हैं। जांच के दौरान आरोप सही पाए गए हैं। इसी तरह मथुरा में तैनात करुणेश त्रिपाठी को भी सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। इनके खिलाफ प्राइवेट आईटीआई संस्थानों को अनियमित भुगतान, 11 अमान्य संस्थानों को 2.53 करोड़ का भुगतान, फर्जी छात्रों से जुड़ी गड़बड़ियां के आरोप जांच के दौरान सही पाए गए हैं। विभाग की तरफ से 19.25 करोड़ की वसूली भी की जाएगी।
वहीं हापुड़ में तैनात संजय कुमार ब्यास को भी बर्खास्त कर दिया है। इसी के साथ 3.23 करोड़ की वसूली के भी आदेश दे दिए गए हैं। इनके खिलाफ छात्रवृत्ति की धनराशि सीधे संस्थानों को ट्रांसफर कर गबन करने और वेबसाइट पर डेटा में कूटरचना कर अनियमितता करने के आरोप लगे थे, जो जांच के दौरान सही पाए गए थे। शाहजहांपुर में तैनात राजेश कुमार को भी बर्खास्त कर दिया गया है। इनके खिलाफ वृद्धावस्था पेंशन योजना में खातों की अदला-बदली कर अपात्रों को लाभ दिए जाने के आरोप लगे थे, जो सही पाए गए है। विभाग की तरफ से 2.52 करोड़ की वसूली भी की जाएगी।
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