भोपाल , जनवरी 8 -- भोपाल में फर्जी अस्पतालों, फर्जी स्टाफ और नियमविरुद्ध संचालित मेडिकल संस्थानों को संरक्षण दिए जाने तथा शिकायत करने पर धमकाने के गंभीर आरोप सामने आए हैं। भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (एनएसयूआई) के प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार ने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) भोपाल डॉ. मनीष शर्मा पर आरोप लगाते हुए पुलिस से निष्पक्ष जांच की मांग की है।
रवि परमार ने आरोप लगाया कि वे पिछले कई महीनों से भोपाल के विभिन्न निजी अस्पतालों, नर्सिंग कॉलेजों और पैथोलॉजी लैब्स में व्याप्त अनियमितताओं को लेकर लिखित शिकायतें कर रहे हैं। शिकायतों के साथ दस्तावेजी साक्ष्य दिए जाने के बावजूद सीएमएचओ कार्यालय द्वारा न तो निरीक्षण कराया गया और न ही पंजीयन निरस्तीकरण या अन्य दंडात्मक कार्रवाई की गई।
एनएसयूआई के जिला अध्यक्ष अक्षय तोमर ने बताया कि 5 दिसंबर 2025 को सीएमएचओ कार्यालय में जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ. रितेश रावत और डॉ. अभिषेक सेन द्वारा तैयार की गई कथित फर्जी और कूटरचित निरीक्षण रिपोर्ट की जानकारी दी गई थी। इस पर सीएमएचओ ने मामले को गंभीर बताते हुए लिखित शिकायत देने को कहा और कार्रवाई का आश्वासन दिया था। इसके बाद 11 दिसंबर 2025 को मुख्यमंत्री, उप मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक, प्रमुख सचिव लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग सहित सीएमएचओ भोपाल को विस्तृत शिकायत भेजी गई। 12 दिसंबर 2025 को संबंधित अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस भी जारी किए गए, लेकिन 25 दिन से अधिक समय बीत जाने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
अक्षय तोमर ने आरोप लगाया कि बार-बार संपर्क करने पर केवल आश्वासन दिए जाते रहे। हाल ही में सीएमएचओ कार्यालय में हुई मुलाकात के दौरान तत्काल कार्रवाई को लेकर सवाल पूछने पर सीएमएचओ डॉ. मनीष शर्मा और डॉ. रितेश रावत द्वारा कथित रूप से धमकाया गया और अभद्र भाषा का प्रयोग किया गया। उन्होंने दावा किया कि यह पूरी घटना कार्यालय में लगे सीसीटीवी कैमरों में कैद है।
रवि परमार ने यह भी आशंका जताई कि शिकायतों से बचने के उद्देश्य से उनके विरुद्ध झूठा मामला दर्ज कराने का प्रयास किया जा रहा है, जिसकी धमकी उन्हें पूर्व में भी दी जा चुकी है। इन आरोपों के बाद एनएसयूआई प्रतिनिधि मंडल हबीबगंज थाने पहुंचा और पुलिस प्रशासन से सीएमएचओ कार्यालय के सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित कर निष्पक्ष जांच करने, फर्जी निरीक्षण रिपोर्ट तैयार करने वाले अधिकारियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने तथा भोपाल में फर्जी अस्पतालों और नर्सिंग संस्थानों को संरक्षण देने की भूमिका की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की।
एनएसयूआई ने चेतावनी दी है कि यदि पूरे मामले में निष्पक्ष और पारदर्शी कार्रवाई नहीं हुई तो संगठन आंदोलन और न्यायालयीन कार्यवाही का रास्ता अपनाएगा। प्रतिनिधि मंडल में अनिमेष गोंडली, शिवम भोपते, शिव पटेल, पर्व सक्सेना, समीर शुक्ला, हिमांशु मगरे, तन्मय सिंह, तनय यादव, जयंत सिंहा, अनुकूल परमार, लक्की पवार, प्रदीप यादव और अमित यादव शामिल रहे।
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