भोपाल , जनवरी 07 -- मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में फर्जी अस्पतालों के बढ़ते जाल और स्वास्थ्य विभाग की कथित लापरवाही को लेकर भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (एनएसयूआई) ने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ. मनीष शर्मा पर गंभीर आरोप लगाए हैं। एनएसयूआई नेताओं का आरोप है कि सैकड़ों फर्जी अस्पताल नर्सिंग स्टाफ और डॉक्टरों के रजिस्ट्रेशन नंबर व प्रमाण पत्रों का दुरुपयोग कर अवैध रूप से संचालित हो रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी होने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
एनएसयूआई के प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार ने कहा कि भोपाल में कई निजी अस्पताल ऐसे नर्सिंग स्टाफ और डॉक्टरों को कागजों में दर्शाकर मान्यता प्राप्त कर रहे हैं, जो या तो शासकीय संस्थानों में पदस्थ हैं या जिन्होंने कभी उन अस्पतालों में कार्य ही नहीं किया। इसके बावजूद अधिकारियों की मिलीभगत से कथित तौर पर फर्जी निरीक्षण रिपोर्ट तैयार कर अस्पतालों को मान्यता दी गई, जो सीधे तौर पर भ्रष्टाचार और जनस्वास्थ्य से खिलवाड़ का मामला है।
रवि परमार ने आरोप लगाया कि कई मामलों में जांच समितियां गठित तो की गईं, लेकिन उनकी रिपोर्ट वास्तविक स्थिति के विपरीत और पूर्व निर्धारित प्रतीत होती हैं। उन्होंने कहा कि भोपाल सीएमएचओ कार्यालय में सैकड़ों शिकायतें लंबित हैं, लेकिन शिकायतकर्ताओं को न्याय दिलाने के बजाय फर्जी अस्पतालों को संरक्षण दिया जा रहा है।
एनएसयूआई के जिला अध्यक्ष अक्षय तोमर ने कहा कि यह मामला केवल प्रशासनिक लापरवाही का नहीं, बल्कि संगठित भ्रष्टाचार और आर्थिक लेन-देन का है। यदि समय रहते कार्रवाई होती, तो भोपाल में फर्जी अस्पतालों की संख्या इस स्तर तक नहीं पहुंचती।
अक्षय तोमर ने यह भी आरोप लगाया कि डॉ. मनीष शर्मा के खिलाफ ग्वालियर में सीएमएचओ रहते हुए लोकायुक्त में भ्रष्टाचार का प्रकरण दर्ज हुआ था, जिसे विभागीय स्वीकृति के लिए शासन को भेजा गया। इसके बावजूद जून 2025 में उन्हें राजधानी भोपाल का सीएमएचओ नियुक्त किया गया, जो कई सवाल खड़े करता है।
उन्होंने कहा कि डॉ. मनीष शर्मा के कार्यकाल में भोपाल की स्वास्थ्य सेवाएं कमजोर हुई हैं और फर्जी अस्पतालों के कारण आम नागरिकों व गंभीर मरीजों की जान के साथ खिलवाड़ हो रहा है, जिसकी जिम्मेदारी स्वास्थ्य विभाग और सीएमएचओ पर है।
एनएसयूआई ने राज्य शासन से मांग की है कि डॉ. मनीष शर्मा के विरुद्ध लोकायुक्त में दर्ज प्रकरण में तत्काल अभियोजन स्वीकृति दी जाए, निष्पक्ष जांच के लिए उन्हें सीएमएचओ पद से हटाया जाए, भोपाल जिले के सभी निजी अस्पतालों की स्वतंत्र व उच्चस्तरीय जांच कराई जाए तथा दोषी अधिकारियों और अस्पताल संचालकों पर कड़ी कार्रवाई की जाए। एनएसयूआई ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई, तो संगठन इस मुद्दे को लेकर सड़क से सदन तक आंदोलन करेगा।
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