नयी दिल्ली , अप्रैल 01 -- उच्चतम न्यायालय ने मध्य प्रदेश के धार के ऐतिहासिक भोजशाला-कमल मौला मस्जिद परिसर मामले में बुधवार को स्पष्ट किया कि वह मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की कार्यवाही में इस स्तर पर हस्तक्षेप नहीं करेगा और उसे भरोसा है कि वह भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के सर्वे के दौरान दर्ज की गई मुस्लिम पक्ष की उन आपत्तियों पर पूरी गंभीरता और 'प्राकृतिक न्याय' के सिद्धांतों के तहत विचार करेगा, जो सर्वे की वीडियोग्राफी में दर्ज हैं।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल पांचोली की खंडपीठ ने 'मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसाइटी' द्वारा दायर विशेष अनुमति याचिका पर सुनवाई की। पीठ ने अपने आदेश में कहा, "हमें इस बात पर संदेह करने का कोई कारण नहीं दिखता कि मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय मस्जिद प्रबंधन की उन आपत्तियों पर विचार नहीं करेगा, जो एएसआई सर्वे की वीडियोग्राफी में दर्ज हैं।"याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद ने न्यायालय से कहा कि अप्रैल 2024 में उच्चतम न्यायालय के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद, विवादित स्थल पर खुदाई की गई है। श्री खुर्शीद ने तर्क दिया कि मस्जिद प्रबंधन ने सर्वे के दौरान ही इन अनियमितताओं पर कड़ी आपत्ति जताई थी, जिसे बाकायदा वीडियो रिकॉर्डिंग में दर्ज किया गया है। उन्होंने मांग की कि इस वीडियो और संबंधित रंगीन तस्वीरों को साक्ष्य के तौर पर प्रस्तुत किया जाए।
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