धार , दिसंबर 30 -- मध्यप्रदेश के धार की ऐतिहासिक भोजशाला में मंगलवार को सत्याग्रह, हवन-पूजन एवं सुंदरकांड का आयोजन किया गया। इस अवसर पर उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर के वरिष्ठ पुजारी एवं अखिल भारतीय पुजारी महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष महेश गुरुजी विशेष रूप से उपस्थित रहे। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में हिंदू समाज के लोग, भोज उत्सव समिति के पदाधिकारी और कार्यकर्ता शामिल हुए।
सभा को संबोधित करते हुए महेश गुरुजी ने भोजशाला मुक्ति आंदोलन में संतों की भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि भोजशाला के इस आंदोलन में आमजन निरंतर सहभागिता निभा रहे हैं, लेकिन देश के वरिष्ठ संत-महात्माओं की सक्रिय उपस्थिति अभी उस स्तर पर नहीं दिख रही है, जिसकी आवश्यकता है।
उन्होंने सनातन धर्म के इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि जब-जब सनातन धर्म पर संकट आया है, तब-तब शंकराचार्यों ने शास्त्रार्थ और संगठन के माध्यम से धर्म की पुनर्स्थापना की है। इसी उद्देश्य से नागा संन्यासियों की परंपरा और अखाड़ों की व्यवस्था बनाई गई, जो आज 13 अखाड़ों के रूप में धर्म की रक्षा में सक्रिय हैं।
महेश गुरुजी ने संतों से मठों से बाहर निकलने का आह्वान करते हुए कहा कि जिस प्रकार देश की सीमाओं पर आक्रमण होने पर सेना डटकर मुकाबला करती है, उसी प्रकार जब देश के भीतर सनातन धर्म, मंदिरों और धार्मिक अवशेषों पर आघात होता है, तब साधु-संतों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण हो जाती है। उन्होंने कहा कि जो संत केवल अपने मठों तक सीमित हैं, उन्हें भोजशाला जैसे आंदोलनों में आकर सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।
उन्होंने हाल ही में हुए एएसआई सर्वे का उल्लेख करते हुए कहा कि सर्वे में हिंदू अवशेषों और मूर्तियों के मिलने की पुष्टि हुई है, जो भोजशाला के सत्य को प्रमाणित करती है। उन्होंने सरकार से इस विषय में स्पष्ट और ठोस कानून बनाए जाने की मांग की, जिससे भोजशाला में प्रतिदिन पूजा-अर्चना का मार्ग प्रशस्त हो सके।
कार्यक्रम के अंत में भोज उत्सव समिति ने संकल्प दोहराया कि भोजशाला की मुक्ति तक प्रत्येक मंगलवार को होने वाला हवन-पूजन और सत्याग्रह निरंतर जारी रहेगा। सुबह से ही भोजशाला परिसर में श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या मौजूद रही और वातावरण जयकारों से गूंजता रहा।
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