लखनऊ , जनवरी 14 -- राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के अखिल भारतीय सह प्रचार प्रमुख नरेन्द्र ठाकुर ने बुधवार को वृन्दावन योजना स्थित त्रयंबकेश्वर महादेव मंदिर प्रांगण में आयोजित हिन्दू सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि हिन्दू समाज में किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं होना चाहिए। श्री ठाकुर ने कहा कि संघ भेदभाव नहीं मानता लेकिन समाज में जातिगत भेदभाव, छुआछूत, भाषा एवं क्षेत्र के आधार पर विभाजन आज भी मौजूद है। ऐसे भेद मिटाकर ही समाज संगठित हो सकता है। उन्होंने कहा कि हमारे धर्म ग्रन्थों में जाति के नाम पर छुआछूत का उल्लेख नहीं है। छुआछूत गुलामी के काल में आई कुरीति है। इसलिए संघ के भीतर किसी प्रकार की जाति नहीं मानी जाती। संघ का स्वयंसेवक जाति को नहीं मानता।

उन्होंने संघ के दूसरे सरसंघचालक माधव राव सदाशिवराम गोलवलकर (गुरुजी) का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने सभी संतों को एक मंच पर लाने का प्रयास किया और "हिन्दवः सोदरा सर्वे" का उद्घोष कराया, जिसका अर्थ है कि सभी हिन्दू सहोदर हैं।

श्री ठाकुर ने कहा कि हिन्दू पतित नहीं हो सकता, सब समान हैं। समाज में जो बुराइयां आई हैं, उन्हें दूर करने के लिए संघ लगातार प्रयास कर रहा है। यदि समाज को एक बनाना है तो जातिगत भेदभाव, छुआछूत, भाषा और क्षेत्रीय भेद से ऊपर उठकर साथ चलना होगा।उन्होंने कहा कि 1948 और 1975 में संघ को समाप्त करने के प्रयास हुए। आपातकाल के दौरान लोकतंत्र की रक्षा के लिए सबसे अधिक संघ के लोग जेल गए। आज संघ के समर्थन में समाज खड़ा है। उन्होंने बताया कि संघ एक लाख से अधिक स्थानों पर कार्य कर रहा है और 1 लाख 30 हजार सेवा कार्य संचालित हैं। संघ से जुड़े 32 से अधिक अखिल भारतीय संगठन समाज जीवन के हर क्षेत्र में सक्रिय हैं। लेकिन समाज बहुत बड़ा है, इसलिए सारी समस्याओं का समाधान संघ अकेले नहीं करेगा। संघ का कार्य समाज का जागरण और व्यक्ति निर्माण है।

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