जयपुर , अप्रैल 09 -- राजस्थान के शिक्षा एवं पंचायत राज मंत्री मदन दिलावर ने भूजल स्तर में लगातार हो रही गिरावट पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि इसके कारणों का विश्लेषण कर प्रभावी समाधान ढूंढना होगा।
श्री दिलावर मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान 2.0 के तहत कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) को बढ़ावा देने के संबंध में आयोजित कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। उन्हाेंने कहा कि जल स्वावलंबन अभियान का मूल उद्देश्य समझना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने जल दोहन को नियंत्रित करने तथा अधिक से अधिक जल पुनर्भरण (वॉटर रिचार्ज) के उपाय अपनाने के कार्य करने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि जल स्तर बढ़ाने के लिए व्यापक स्तर पर पौधारोपण, चारागाह विकास, तालाबों एवं एनीकेट (छोटे बांध) का निर्माण, विलुप्त नदियों का पुर्नजीवित तथा अन्य जल स्रोतों का सृजन आवश्यक है। साथ ही, प्राकृतिक जल मार्गों में आई बाधाओं को दूर कर जल के प्राकृतिक प्रवाह को पुनर्स्थापित करना चाहिए। उन्होंने इस दिशा में सुझाव आमंत्रित करते हुए अब तक किए गए प्रयासों की सराहना की और विकास कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए।
श्री दिलावर ने प्रत्येक ग्राम पंचायत में गौ वंश के संरक्षण को लेकर कार्य योजना बनाने पर भी चर्चा कर निर्देश दिए। उन्होंने कार्यशाला में पोलीथीन का इस्तेमाल नहीं करने का संकल्प भी दिलाया। उन्होंने जल उपलब्धता के आंकड़े बताते हुए डार्क जॉन के खतरे से निपटने की दिशा में कार्य के भी निर्देश दिए।
पंचायत राज राज्य मंत्री ओटाराम देवासी ने कहा कि मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान एक व्यापक एवं महत्वपूर्ण योजना है, जिसका मुख्य उद्देश्य बहते हुए जल को रोककर उसका संरक्षण करना है। उन्होंने सिरोही जिले में धरातल जल स्तर में आई उल्लेखनीय वृद्धि का उदाहरण देते हुए वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई।
श्री देवासी ने जनभागीदारी को इस अभियान की सफलता का प्रमुख आधार बताते हुए कहा कि सामूहिक प्रयासों से ही जल संरक्षण संभव है। उन्होंने बावड़ियों, तालाबों के पुनर्जीवन, घास विकास, पौधारोपण एवं अन्य जल स्रोतों के निर्माण को प्राथमिकता देने को कहा।
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