पटना , जनवरी 03 -- बिहार के उपमुख्यमंत्री और राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने शनिवार को कहा कि भूमि से संबंधित मामलों में जाली और कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर खेल अब किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

श्री सिन्हा ने कहा कि चाहे नामांतरण हो, दाखिल-खारिज हो या सरकारी भूमि का मामला, फर्जी कागजात सामने आते ही संबंधित व्यक्ति पर आपराधिक कार्रवाई अनिवार्य होगी। उन्होंने कहा कि अंचलाधिकारी स्वयं प्राथमिकी दर्ज कराएंगे और किसी भी स्तर पर लापरवाही या संरक्षण को गंभीर कदाचार माना जाएगा। उन्होंने कहा कि जमीन माफिया, दलाल और फर्जीवाड़ा करने वालों के खिलाफ सरकार की नीति स्पष्ट है और इस संबंध में शून्य सहनशीलता के साथ कानून का कठोरता से अनुपालन किया जायेगा।

विभाग के सचिव गोपाल मीणा ने सभी अंचलाधिकारियों को पत्र लिखकर स्पष्ट निर्देश दिया है कि यदि किसी भी भू-राजस्व कार्यवाही में जाली, कूटरचित अथवा मिथ्या दस्तावेज प्रस्तुत किए जाने की बात प्रथम दृष्टया सामने आती है, तो संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता, 2023 के सुसंगत प्रावधानों के तहत स्थानीय थाना में अनिवार्य रूप से प्राथमिकी दर्ज कराई जाए।

इस निर्देश को निर्देश उपमुख्यमंत्री श्री सिन्हा की पहल पर चल रहे भूमि सुधार जन कल्याण संवाद के दौरान प्रमंडलीय मुख्यालयों में आयोजित जनसंवाद कार्यक्रमों में सामने आए तथ्यों के बाद जारी किया गया है।

विभाग के अनुसार नामांतरण, दाखिल-खारिज, परिमार्जन प्लस, बंदोबस्ती, सीमांकन, भू-अर्जन तथा सार्वजनिक भूमि से जुड़े मामलों में कई बार फर्जी दस्तावेज प्रस्तुत कर प्रशासन को गुमराह करने की कोशिश की जा रही है, जो गंभीर आपराधिक कृत्य की श्रेणी में आता है।

सचिव ने अपने आदेश में यह भी उल्लेख किया है कि पूर्व की समीक्षात्मक बैठकों में ऐसे मामले सामने आने के बावजूद कई स्थानों पर अंचल स्तर से प्राथमिकी दर्ज नहीं कराई गई, जिसे गंभीर लापरवाही माना गया है।आदेश में भारतीय न्याय संहिता, 2023 की जिन धाराओं के तहत कार्रवाई की जा सकती है, उनमें कूटरचना, कूटरचित दस्तावेज का उपयोग, छल, रिष्टि (मिस्चीफ) और आपराधिक षड्यंत्र से संबंधित प्रावधान शामिल हैं।

निर्देश के अनुसार,सरकारी भूमि से जुड़े मामलों में संबंधित अंचलाधिकारी स्वयं स्थानीय थाना में प्राथमिकी दर्ज कराएंगे। निजी या रैयती भूमि के विवाद में जांचोपरांत अंचलाधिकारी या राजस्व पदाधिकारी की अनुशंसा पर परिवादी के आवेदन के आधार पर प्राथमिकी दर्ज की जाएगी।इसके साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि जाली दस्तावेज के आधार पर कोई आदेश पारित नहीं किया जाए। यदि पूर्व में ऐसा कोई आदेश पारित हो चुका है, तो उसकी विधि-सम्मत समीक्षा कर नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। ऐसे मामलों में प्राथमिकी दर्ज नहीं कराना या मामले को दबाने का प्रयास कर्तव्य में घोर लापरवाही और कदाचार माना जाएगा। इसके लिए संबंधित अंचलाधिकारी व्यक्तिगत रूप से उत्तरदायी होंगे।

विभाग ने सभी प्रमंडलीय आयुक्तों, समाहर्त्ताओं, वरीय पुलिस अधीक्षकों, पुलिस अधीक्षकों और भूमि सुधार उप समाहर्त्ताओं को भी इस आदेश की प्रतिलिपि भेजते हुए आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।

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