नयी दिल्ली , जनवरी 01 -- ग्रामीण विकास मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले भूमि संसाधन विभाग ने वर्ष 2025 में भूमि रिकॉर्ड के डिजिटलीकरण और जल संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। डिजिटल इंडिया भूमि रिकॉर्ड आधुनिकीकरण कार्यक्रम (डीआईएलआरएमपी) के तहत देश के 97 प्रतिशत से अधिक गांवों में भूमि रिकॉर्ड का कंप्यूटरीकरण कर लिया गया है और 97 प्रतिशत गांवों के नक्शे भी डिजिटल कर दिए गए हैं।
सरकार की पहल के बाद अब देश के 19 राज्यों में आम नागरिक घर बैठे डिजिटल रूप से प्रमाणित और कानूनी रूप से मान्य भूमि रिकॉर्ड डाउनलोड कर सकते हैं, जिससे आम लोगों को बड़ी राहत मिली है। इसके साथ ही लगभग 85 प्रतिशत गांवों में जमीन के लिखित रिकॉर्ड को नक्शों से जोड़ दिया गया है। इस व्यवस्था से बैंकों को भी फायदा हुआ है और 406 जिलों में बैंक ऑनलाइन भूमि की जांच कर ऋण प्रक्रिया को तेज कर रहे हैं।
शहरी क्षेत्रों में जमीन से जुड़े विवादों और अव्यवस्था को दूर करने के लिए शुरू की गई नकशा (एनएकेएसएचए) योजना के तहत 157 शहरी निकायों में काम तेजी से आगे बढ़ा है। इनमें से 116 शहरों में ड्रोन और हवाई सर्वे पूरा हो चुका है, जबकि 21 शहरों में सर्वे का कार्य पूरा कर लिया गया है। बेहतर प्रदर्शन करने वाले 24 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को केंद्र सरकार की ओर से 1050 करोड़ रुपये की विशेष सहायता की सिफारिश की गयी है।
सरकार ने जमीन की पहचान को आसान और पारदर्शी बनाने के लिए यूनिक लैंड पार्सल आइडेंटिफिकेशन नंबर (यूएलपीआईएन) लागू किया है, जिसे 'भूमि का आधार' कहा जा रहा है। यह 14 अंकों का यूनिक कोड अब तक 36 करोड़ से अधिक भूमि पार्सलों (जमीन का विशिष्ट और पहचाना जाने वाला टुकड़ा) को दिया जा चुका है। इससे फर्जी लेन-देन और बेनामी सौदों पर रोक लगने की उम्मीद है।
जमीन की रजिस्ट्री (पंजीकरण) प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए वन नेशन, वन रजिस्ट्रेशन (एक देश, एक पंजीकरण) प्रणाली भी लागू की गई है। फिलहाल यह व्यवस्था 17 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में शुरू हो चुकी है। इसके तहत 88 प्रतिशत से अधिक सब-रजिस्ट्रार कार्यालय राजस्व विभाग से जुड़ गए हैं, जिससे रजिस्ट्री के तुरंत बाद नाम में परिवर्तन अपने आप हो रहा है।
महिलाओं को भूमि अधिकारों में सशक्त बनाने की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए भूमि रिकॉर्ड में लिंग के कॉलम को अनिवार्य कर दिया गया है। इससे महिलाओं के नाम पर जमीन की सही जानकारी सामने आएगी और सरकारी योजनाओं का लाभ उन्हें सीधे मिल सकेगा।
प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के वाटरशेड विकास घटक (डब्ल्यूडीसी-पीएमकेएसवाई) के तहत सूखा प्रभावित और वर्षा आधारित क्षेत्रों में जल संरक्षण को नई मजबूती मिली है। इस योजना के अंतर्गत 1220 परियोजनाएं स्वीकृत की गयी हैं, जो 52.93 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को कवर करती हैं। अब तक राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को 5576 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता जारी की जा चुकी है।
वर्ष 2025 के दौरान 17,237 जल संरक्षण संरचनायें बनाई या पुनर्जीवित की गईं, जिससे 35,882 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा बढ़ी और 4.86 लाख किसानों को सीधा लाभ मिला है। इसके अलावा लगभग 14 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में पौधारोपण किया गया।
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