थिम्पू (भूटान) , नवम्बर 11 -- भारत ने ऊर्जा परियोजनाओं के वित्तपोषण के लिए भूटान को चार हजार करोड़ रुपये की ऋण सहायता की घोषणा करते हुए द्विपक्षीय सहयोग को अधिक मजबूत बनाने के लिए नवीकरणीय ऊर्जा, मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं और स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में तीन समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किये हैं।

भूटान की दो दिन की यात्रा पर आये प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को यहां भूटान के नरेश जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक से मुलाकात की। दोनों नेताओं ने इस अवसर पर 1020 मेगावाट की पुनात्सांगछू-दो जलविद्युत परियोजना का संयुक्त रूप से उद्घाटन किया। दोनों देशों ने 1200 मेगावाट पुनात्सांगछू-एक जलविद्युत परियोजना के मुख्य बांध ढांचे पर फिर से काम शुरू करने पर भी सहमति जतायी। इसके अलावा भारत ने वाराणसी में एक भूटानी मंदिर/ मठ और अतिथि गृह के निर्माण के लिए भूमि अनुदान की भी घोषणा की है। भारत ने गेलेफू में एक आव्रजन चौकी स्थापित करने का भी निर्णय लिया है।

दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों को और प्रगाढ़ एवं सुदृढ़ बनाने पर विचारों का आदान-प्रदान किया। उन्होंने पारस्परिक हित के क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी चर्चा की। भूटान नरेश ने दिल्ली में विस्फोट की घटना में लोगों की मौत पर भी शोक व्यक्त किया।

श्री मोदी ने दोनों देशों के बीच मैत्री और सहयोग के घनिष्ठ संबंधों को आकार देने में विभिन्न राजाओं के मार्गदर्शक दृष्टिकोण की सराहना की। नरेश ने भूटान के सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए भारत सरकार द्वारा दिये गये अमूल्य सहयोग की सराहना की।

दोनों नेताओं ने भारत से लाये गये भगवान बुद्ध के पवित्र पिपरहवा अवशेषों के समक्ष प्रार्थना की जो ताशिछोद्ज़ोंग के ग्रैंड कुएनरे हॉल में प्रतिष्ठित हैं। थिम्पू में पवित्र पिपराहवा अवशेषों की प्रदर्शनी, चतुर्थ नरेश की 70वीं जयंती और वैश्विक शांति एवं खुशहाली के लिए भूटान द्वारा आयोजित वैश्विक शांति प्रार्थना महोत्सव के अवसर पर आयोजित की जा रही है।

दोनों नेताओं ने 1020 मेगावाट की पुनात्सांगचु- दो जलविद्युत परियोजना का संयुक्त रूप से उद्घाटन किया जो भारत और भूटान के बीच जीवंत तथा बढ़ती पारस्परिक रूप से लाभकारी ऊर्जा साझेदारी में मील का पत्थर है जिसने दोनों देशों के आम लोगों के जीवन में लाभ पहुंचाया है।

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