भुवनेश्वर , फरवरी 12 -- ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में शनिवार से शुरू हो रहे 'भव्य तोशाली स्वदेशी मेला' में 20 राज्यों के शिल्पकार और बुनकर भाग लेंगे।
ओडिशा के हथकरघा, कपड़ा और हस्तशिल्प मंत्री प्रदीप बाल सामंता ने इस मेले को बुनकरों और शिल्पकारों के लिए 'समृद्धि का भव्य संगम' बताया और पारंपरिक शिल्प को बढ़ावा देने तथा आजीविका को मजबूत करने में इसकी भूमिका का उल्लेख किया।
ओडिशा सरकार के हथकरघा, कपड़ा और हस्तशिल्प विभाग द्वारा आयोजित इस वर्ष के मेले का विषय 'स्वदेशी और आत्मनिर्भर भारत' है। यह कार्यक्रम भारत सरकार के विकास आयुक्त (हस्तशिल्प) द्वारा प्रायोजित है।
विभिन्न राज्यों के हस्तशिल्प कलाकार 150 स्टालों में अपने उत्पादों की प्रदर्शनी लगाएंगे, जबकि विकास आयुक्त (हथकरघा) के तत्वावधान में 50 स्टालों में बुनकर अपने हथकरघा उत्पादों का प्रदर्शन करेंगे। इसके अतिरिक्त, राज्य सरकार के हस्तशिल्प निदेशालय और कपड़ा एवं हथकरघा निदेशालय के तहत 281 शिल्पकार और 150 बुनकर इसमें भाग लेंगे।
पहली बार 200 स्टालों में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) उत्पादों को प्रदर्शित किया जाएगा, जिनमें बिजली के उपकरण, बैंकिंग और वित्तीय सेवाएं, ऑटोमोबाइल, घरेलू उपकरण और दैनिक उपयोग की अन्य घरेलू वस्तुएं शामिल होंगी।
आगंतुक 60 खाद्य स्टालों पर स्वदेशी व्यंजनों का आनंद भी ले सकेंगे। राज्य द्वारा संचालित प्रमुख हथकरघा और हस्तशिल्प संगठन जैसे बोयानिका, संबलपुरी वस्त्रालय, रेशम ओडिशा और उत्कलिका चार समर्पित स्टालों में अपने उत्पादों का प्रदर्शन करेंगे। लघु उद्योग विकास एवं सहायता निगम लिमिटेड (एसआईडीएसी) और लघु एवं कृषि उद्योग विकास एवं हस्तशिल्प निगम (एसएडीएसएसी) जैसे प्रमुख विभागीय संस्थान शिल्पकारों और बुनकरों की सहायता के लिए की गई विशेष पहलों को प्रदर्शित करेंगे।
हथकरघा, कपड़ा और रेशम को समर्पित तीन विषयगत मंडप स्थापित किये गये हैं, जो विभिन्न सरकारी योजनाओं की सफलता की कहानियों, हालिया घोषणाओं और राज्य सरकार की नयी पहलों पर प्रकाश डालेंगे।
मेले में हस्तशिल्प कलाकारों द्वारा सीधा प्रदर्शन किया जाएगा। 24 फरवरी को भुवनेश्वर के कलाभूमि (सिदक) में 1,000 शिल्पकारों की भागीदारी वाली एक भव्य टेराकोटा कला प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी।
प्रसिद्ध कलाकारों द्वारा ओडिसी और गोटीपुआ प्रदर्शन के साथ-साथ पूरे भारत के लोक नृत्यों और संगीत सहित सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए जाएंगे।
ओडिशा की समृद्ध हथकरघा और हस्तशिल्प विरासत पर आधारित एक 'फैशन शो' पहली बार आयोजित किया जाएगा, जिसमें प्रसिद्ध डिजाइनर और बुनकर शामिल होंगे। इस वर्ष 'ड्रोन शो' की भी शुरुआत होगी। इसके साथ ही 'स्वदेशी और आत्मनिर्भर भारत' विषय पर प्रतिदिन सेमिनार आयोजित किये जाएंगे।
श्री सामंता ने कहा कि मेले में लगभग 30 लाख आगंतुकों के आने और 30 करोड़ रुपये का कारोबार होने की उम्मीद है। उन्होंने शिल्पकारों और कारीगरों की आजीविका को मजबूत करने और आर्थिक सशक्तिकरण के प्रति राज्य सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई।
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