भुवनेश्वर , अप्रैल 14 -- ओडिशा के राज्यपाल हरि बाबू कंभमपति ने मंगलवार को कहा कि भुवनेश्वर को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की जिम्मेदारी न केवल सरकार की है, बल्कि समान रूप से यहां के नागरिकों की भी है।
राज्यपाल ने राजधानी के 78वें स्थापना दिवस समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि नागरिकों को शहर की विरासत को संरक्षित करने और इसके भविष्य को संवारने में सक्रिय योगदान देना चाहिए। उन्होंने निवासियों से प्रगतिशील और लचीली जीवनशैली अपनाने तथा पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार, प्रदूषण मुक्त और स्वच्छ शहर बनाने का आह्वान किया।
भुवनेश्वर और राज्य के लोगों को बधाई देते हुए श्री कंभमपति ने इसे एक ऐसा शहर बताया जो आधुनिक भारत की आकांक्षाओं को अपनाते हुए राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को दर्शाता है। उन्होंने राजधानी के डिजाइन और स्थापना में दूरदर्शी नेतृत्व के लिए ओटो कोनिग्सबर्गर और पूर्व मुख्यमंत्री हरेकृष्ण महताब को श्रद्धांजलि दी।
राज्यपाल ने शहर की ऐतिहासिक विरासत का उल्लेख करते हुए कहा कि भुवनेश्वर प्राचीन कलिंग की विरासत में गहराई से रचा-बसा है। उन्होंने इसे सम्राट अशोक के शांति संदेश और खारवेल के शासनकाल में जैन धर्म के उत्कर्ष से जोड़ा, जिसकी झलक उदयगिरि और खंडगिरि की गुफाओं में मिलती है।
श्री कंभमपति ने भुवनेश्वर को 'भारत का मंदिर शहर' बताते हुए लिंगराज मंदिर, मुक्तेश्वर मंदिर, राजारानी मंदिर और परशुरामेश्वर मंदिर जैसे स्मारकों को वास्तुकला की भव्यता और आध्यात्मिक विरासत का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि 1948 में एक योजनाबद्ध राजधानी के रूप में स्थापित होने के बाद से भुवनेश्वर शासन, शिक्षा, प्रौद्योगिकी और संस्कृति के एक जीवंत केंद्र के रूप में उभरा है। उन्होंने प्रमुख राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय आयोजनों की मेजबानी करने के कारण इसे 'भारत की खेल राजधानी' भी कहा।
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