अलवर , अक्टूबर 25 -- राजस्थान में खैरथल तिजारा जिले के भिवाड़ी में एक मिनी बिहार बसता है अनुमान है कि यहां छठ पर एक लाख से अधिक बिहार ल के लोग 40 से अधिक कृत्रिम घाटों पर अर्ध्य देंगे।

इन दिनों बिहार के लोग क्षेत्र में छठ पूजा में लगे हुए है। एक अनुमान के अनुसार यहां छह औद्योगिक क्षेत्रों में करीब एक लाख बिहार मूल के लोग रहते हैं जो इस क्षेत्र के औद्योगिक विकास की धुरी है। इन दिनों भिवाड़ी सहित आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों में बाजारों में बड़ी चहल पहल है। विशेष आयोजन के लिए इस क्षेत्र में बाकायदा छठ पूजन सेवा समिति बनायी हुई है जो बिहार के धार्मिक आयोजन को प्रमुखता से देखती है। भिवाड़ी औद्योगिक नगरी में छठ महापर्व की पूजा अर्चना का धार्मिक आयोजन शुरू हो गया है। शहर में करीब 40 से अधिक स्थानों पर कृत्रिम घाट बनाए जा रहे हैं, जहां महिलाएं-पुरुष व्रत रखकर सूर्य देव को अर्घ्य चढ़ाएंगे। छठ पूजा सेवा समिति के प्रयासों से पुराने घाटों की साफ-सफाई तेजी से की गई। जबकि यूआईटी और आरबी क्षेत्र में पार्कों में युद्ध स्तर पर सफाई की गयी है।

बिहार (पूर्वांचल) से आये लोगों के शहर में यह महापर्व बड़े उत्साह के साथ मनाया जा रहा है और बाजारों में बिहार से मंगाई गई सामग्री की खरीदारी जोरों पर है। छठ पूजा का शुभारंभ शनिवार को 'नहाय खाय' से हो चुका है, जो 28 अक्टूबर तक चलेगा। इन लोगों में ज्यादातर मजदूर वर्ग के लोग हैं जो इस छठ पूजा पर बिहार नहीं जाकर अपने समूह के रूप में इस आयोजन में भागीदारी करते हैं।

समिति के सचिव संजीव सिंह ने कहा, " यह पूर्वांचल का सबसे प्रमुख त्योहार है। 27 अक्टूबर को सेक्टर-5 के शिव मंदिर पार्क में पूजा-अर्चना के बाद भोजपुरी सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होगा। 28 अक्टूबर को सुबह साढृे पांच बजे अंतिम अर्घ्य के साथ महापर्व संपन्न होगा।"उन्होंने कहा कि सेक्टर-5 के कृत्रिम घाट पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचेंगे। भिवाड़ी शहर के सेंट्रल मार्केट, हरचंदपुर, नयागांव, हेतराम चौक, फूल बाग चौक, सूरज सिनेमा, सहित कहरानी और चोपानकी में दुकानें छठ सामग्री से सजी हुई हैं। ज्यादातर सामान बिहार से लाया जा रहा है, जो पहले दिल्ली के आजादपुर मंडी पहुंचता है और फिर भिवाड़ी में आपूर्ति की जाती है। चार दिन तक चलने वाले इस छठ पूजा कार्यक्रम में बाकायदा बाजार लगाये गये हैं।

बिहार के सिवान जिले के निवासी कृष्ण ने बताया कि वह भिवाड़ी में रहते हैं। भिवाड़ी की आबादी का 50 प्रतिशत हिस्सा बिहार मूल के लोगों का है। यहां यह पर्व हर्षोल्लास से मनाया जाता है। व्रत की सामग्री जैसे मीठा नींबू, सूखा नारियल, सुपारी, चावल, अलसी के पत्ते, तिल, गंगाजल, शकरकंदी, हल्दी, अदरक, मौली, अनन्नास, टोकरी आदि बिहार से ही आ रही हैं। एक फल 'कीवी' को छोड़कर बाकी सभी फल व्रत में काम आते हैं और इनकी बिक्री भी बहुत हो रही है।

उसने बताया कि छठ पूजा में काम आने वाले फल और सामान हर बिहारी परिवार खरीदता है। बिहार का यह महत्वपूर्ण महापर्व है। जिन बिहार के मजदूर और कर्मचारियों को छुट्टियां मिल जाती हैं, वे अपने बिहार जाकर इस महापर्व को मनाते हैं, लेकिन जिन्हें छुट्टियां नहीं मिलती, वे यहीं पर ही इस पर्व को मनाते हैं। भिवाड़ी में करीब पांच हजार छोटी बड़ी कंपनियां हैं। ऐसी कोई कंपनी नहीं है जिसमें बिहार के लोग काम नहीं करताे हों। बिहार के लोगों में एक खास बात यह है कि यह परिवार सहित ही पलायन कर कर आते हैं और परिवार का लगभग हर सदस्य किसी न किसी कंपनी में किसी न किसी रूप में काम करता है।

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