पटना , जनवरी 10 -- भारतीय नृत्य कला मंदिर की प्रशासी पदाधिकारी सुश्री कहकशां ने शनिवार को कहा कि लोकनायक भिखारी ठाकुर ने सामाजिक कुरीतियों के उन्मूलन के लिए अपना संपूर्ण जीवन समर्पित कर दिया।
बिहार कला एवं संस्कृति विभाग अंतर्गत भारतीय नृत्य कला मंदिर, पटना के सौजन्य से आयोजित "भिखारी ठाकुर स्मृति समारोह" का शुभारंभ आज हुआ।
इस अवसर पर सुश्री कहकशां ने कहा कि लोकनायक भिखारी ठाकुर ने सामाजिक कुरीतियों के उन्मूलन के लिए अपना संपूर्ण जीवन समर्पित कर दिया। उन्होंने अपने नाटकों और गीतों के माध्यम से समाज को जागरूक करने का जो कार्य किया, वह आज भी उतना ही प्रासंगिक और प्रेरणादायी है। उन्होंने भिखारी ठाकुर के जीवन, संघर्ष और उनके सामाजिक अवदान पर विस्तार से प्रकाश डाला।
सांस्कृतिक कार्यक्रम की पहली प्रस्तुति युवा कलाकार पूजा उपाध्याय द्वारा दी गई। उन्होंने भिखारी ठाकुर की समृद्ध गीत परंपरा में कजरी सहित अन्य लोकगीतों की भावपूर्ण प्रस्तुति देकर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। उनकी प्रस्तुति से पूरा सभागार "भिखारीमय" हो उठा और स्मृति समारोह लोक रंगों से सराबोर हो गया।
इसके बाद आयोजित संगोष्ठी में सर्वप्रथम प्रख्यात साहित्यकार, लोकगायक एवं संगीत नाटक अकादमी के पूर्व अध्यक्ष डॉ. शंकर प्रसाद ने भिखारी ठाकुर की समसामयिक प्रासंगिकता पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि जो रचना दो सौ वर्षों बाद भी स्मरण की जाती है, वही सच्चे अर्थों में कालजयी और प्रासंगिक होती है। उन्होंने उल्लेख किया कि शेक्सपियर के नाटकों में गीतों की महत्ता को देखते हुए राहुल सांकृत्यायन ने भिखारी ठाकुर को "भोजपुरी का शेक्सपियर" कहा था, जो उनके रचनात्मक कद और व्यापक प्रभाव को दर्शाता है।
समारोह के अंत में उपस्थित अतिथियों, कलाकारों एवं श्रोताओं ने भिखारी ठाकुर के सामाजिक, सांस्कृतिक और साहित्यिक योगदान को स्मरण करते हुए उनके विचारों को आज के समाज में आत्मसात करने का संकल्प लिया।
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