पटना , जनवरी 04 -- बिहार में भिक्षावृत्ति पर प्रभावी रोक लगाने और भिक्षुकों को सम्मानजनक जीवन देने की दिशा में मुख्यमंत्री भिक्षावृत्ति निवारण योजना के तहत भिक्षुकों को न केवल पुनर्वास की सुविधा दी जा रही है, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए रोजगार, प्रशिक्षण और आर्थिक सहायता भी उपलब्ध कराई जा रही है।

फिलहाल राज्य के 10 जिलों पटना, गया, नालंदा, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, पूर्णिया, सहरसा, भागलपुर, मुंगेर और सारण में कुल 19 भिक्षुक पुनर्वास गृह संचालित किये जा रहे हैं। इन पुनर्वास केंद्रों में वृद्ध, दिव्यांग और शारीरिक रूप से अक्षम भिक्षुकों को निःशुल्क भोजन, वस्त्र, आवास, चिकित्सा, परामर्श, मनोरंजन, योग और जीवनोपयोगी प्रशिक्षण जैसी मूलभूत सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं। साथ ही उन्हें बिछड़े परिवार से जोड़ने का भी प्रयास किया जा रहा है।

समाज कल्याण विभाग के आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, इस योजना के अंतर्गत अब तक 544 भिक्षुकों को स्वरोजगार के लिये आर्थिक सहायता दी जा चुकी है। सरकार की ओर से पात्र भिक्षुकों को छोटा व्यवसाय शुरू करने के लिये 10 हजार रुपये तक की एकमुश्त सहायता प्रदान की जाती है। इसके साथ ही आधार कार्ड, पैन कार्ड और बैंक खाता खुलवाने में भी सहयोग किया जाता है। वृद्ध, विधवा और दिव्यांग भिक्षुकों को पेंशन योजना से जोड़ा जा रहा है, जबकि बच्चों की शिक्षा और युवाओं के लिए कौशल प्रशिक्षण की व्यवस्था की गई है।

राज्य में फिलहाल छह सक्षम उत्पादक समूह भी संचालित हैं, जहां भिक्षुकों को विभिन्न स्किल डेवलपमेंट कोर्स कराये जा रहे हैं। इन समूहों के माध्यम से अगरबत्ती, दिया-बाती, नारियल झाड़ू, चप्पल और जूट से बने उत्पादों का निर्माण और बिक्री की जा रही है। इससे होने वाली आय सीधे निर्माताओं में वितरित की जाती है, जिससे उनकी आजीविका मजबूत हो रही है।

इसके अलावा पूर्वी चंपारण, सीतामढ़ी, मधुबनी, वैशाली, अररिया, किशनगंज, जमुई, शेखपुरा, लखीसराय, मधेपुरा, औरंगाबाद, कटिहार, अरवल और रोहतास जिलों में 14 नये भिक्षुक पुनर्वास गृह, जबकि भोजपुर जिले में 2 हाफ-वे होम की स्थापना और संचालन की प्रक्रिया चल रही है।

योजना का लाभ बिहार के मूल निवासी भिक्षुकों को दिया जाता है, जिनका परिवार भिक्षावृत्ति पर निर्भर हो। इसके लिए कोई आयु सीमा निर्धारित नहीं है, हालांकि बाल भिक्षुकों और वृद्धों के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं। आवेदन के लिए आर्थिक स्थिति प्रमाण पत्र, विकलांगता या गंभीर बीमारी की स्थिति में चिकित्सकीय प्रमाण पत्र आवश्यक है। इच्छुक भिक्षुक अपने जिले के जिला सामाजिक सुरक्षा कोषांग या जिला कार्यक्रम प्रबंधन इकाई (सक्षम कार्यालय) में संपर्क कर आवेदन कर सकते हैं। भौतिक सत्यापन के बाद पात्र लाभुकों को योजना से जोड़ा जाता है।

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