बैतूल , दिसम्बर 7 -- मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में भावांतर भुगतान योजना के पंजीयन में बड़े फर्जीवाड़े का मामला उजागर हुआ है। जिला प्रशासन ने जांच में अनियमितताएं सामने आने के बाद भैंसदेही और चिल्कापुर, भीमपुर की प्राथमिक सहकारी समितियों के फर्जी पंजीयन प्रकरण में चार व्यक्तियों पर एफआईआर दर्ज कर दी है। प्रशासन ने तत्काल प्रभाव से लाखों रुपये के भुगतान पर भी रोक लगा दी है।

जांच रिपोर्ट के अनुसार, ग्राम बांटलाकलां निवासी कृतिका धाड़से, रेहटीया हरदा दादू निवासी भावेश धाड़से और मीनाक्षी धाड़से ने बिना सिकमी (बटाई/ठेका) के ही भावांतर योजना में पंजीयन करा लिया था। वहीं ग्राम जामझीरी निवासी सहादेव माकोड़े ने योजना प्रारंभ होने से पहले ही नियम विरुद्ध पंजीयन करा लिया था।

जांच में यह तथ्य सामने आया कि जिन खाताधारकों के नाम पर पंजीयन किया गया, वे स्वयं अपनी भूमि पर खेती कर रहे थे तथा किसी भी प्रकार का ठेका या बटाई का करार नहीं हुआ था। इसके बावजूद बटाईदार बताकर योजना का लाभ लेने का प्रयास किया गया।

एसडीएम भैंसदेही के अनुसार, भावांतर योजना में किसान स्वयं या बटाईदार के रूप में ही पंजीयन करा सकता है, लेकिन इस मामले में दावा करने वाले व्यक्ति वास्तव में बटाईदार थे ही नहीं। फर्जी पंजीयन के आधार पर लगभग 150 क्विंटल उपज पर करीब 7.5 लाख रुपये का भुगतान बनता था। मॉडल रेट के अनुसार इन व्यक्तियों को लगभग 1.80 लाख रुपये का अतिरिक्त लाभ मिलता, जिसे प्रशासन ने समय रहते रोक दिया।

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