तिरुवनंतपुरम , नवंबर 17 -- आतंकवाद मामलों के विशेषज्ञों का मानना है कि भारत साइबर-आतंकवाद के मामलों में अभी आधी लड़ाई लड़ रहा है।

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों, फोरेंसिक विश्लेषकों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे के सलाहकारों के एक पैनल की ओर से इस सप्ताह जारी एक नई रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत साइबर-आतंकवाद के संचालन के 'दूसरे चरण' का सामना कर रहा है, जहां जांच को ही निशाना बनाया जाता है।

अध्ययन में शामिल एक वरिष्ठ पर्यवेक्षी नियंत्रण और डेटा अधिग्रहण (एससीडीए) सुरक्षा विशेषज्ञ ने बताया कि दूसरा चरण जाँच शुरू होते ही शुरू हो जाता है। उन्होंने कहा,"यही वह जगह है जहां भारत सबसे असुरक्षित है। यदि आंतरिक प्रक्रियाएं विफल हो जाती हैं, तो हमलावर को कुछ और करने की आवश्यकता नहीं होती। जांच अपने आप ही ध्वस्त हो जाती है।"रिपोर्ट के अनुसार किसी साइबर घटना का पहला चरण जैसे पावर ग्रिड का ठप होना, अस्पताल का नेटवर्क ठप होना, या महत्वपूर्ण सर्वरों का अचानक बंद होना नाटकीय होता है और इसे नजरअंदाज करना असंभव है। पर आगे जो होता है उसका फायदा नकारात्मक शक्तियां तेजी से उठाती हैं।

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