बेंगलुरु , नवंबर 15 -- अर्थशास्त्री और नीति विशेषज्ञ शमिका रवि ने कहा है कि भारत में शिक्षित बेरोजगारी तो बढ़ रही है लेकिन प्रतिभा की कमी भी उसी गति से बनी हुई है। उन्होंने स्नातक बेरोजगारी और उद्योग की मांग के बीच बढ़ते अंतर को दूर करने की तत्काल आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि इस अंतर को पाटने में विश्वविद्यालयों को अपनी भूमिका निर्धारित करनी होगी।
सुश्री रवि ने शनिवार को चाणक्य विश्वविद्यालय के स्थापना दिवस समारोह में कहा कि महामारी के बाद भारत की अर्थव्यवस्था मजबूती से बढ़ रही है लेकिन शिक्षा से रोजगार तक की प्रक्रिया में चुनौतियां देश की विकासशील भारत की महत्वाकांक्षाओं को कमजोर कर रही हैं। उन्होंने भारतीय कार्यबल में एक विरोधाभास की ओर इशारा करते हुए कहा, "30 साल से कम आयु के युवाओं में सबसे शिक्षित वर्ग के बेरोजगार होने की संभावना केवल स्कूली शिक्षा प्राप्त करने वालों की तुलना में लगभग पांच गुना अधिक है।"उन्होंने कहा कि उद्योग सर्वेक्षण बार-बार संकेत कर रहे हैं कि मौजूदा फर्मों के विकास और नई फर्मों की स्थापना में सबसे बड़ी बाधा पूंजी नहीं बल्कि कुशल जनशक्ति है। उन्होंने तमिलनाडु में एक औद्योगिक सर्वेक्षण का उल्लेख करते हुए कहा कि अनुभवी अभ्यर्थियों की कमी के कारण कंपनियां मध्यम क्रम के प्रबंधकों की भर्ती इटली से कर रही हैं।
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