सहारनपुर , जनवरी 3 -- केंद्रीय नीति आयोग के सदस्य एवं कृषि वैज्ञानिक प्रो दिनेश चंद ने कहा कि भारत 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने की अपनी आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए सधे कदमों से उत्तरोत्तर आगे बढ़ रहा है।
प्रो चंद ने यूनीवार्ता से बातचीत में कहा " इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए आवश्यक है कि आर्थिक वृद्धि व्यापक आधार वाली हो ताकि विकास के लाभ अधिक व्यापक आर्थिक वर्गों तक पहुंच सके। क्षमता निर्माण करके और रोजगार की मदद करके यह मांग की भी मदद कर सकता है और आपूर्ति की भी।"उन्होंने कहा कि देश अब आगामी 21 वर्षों के लिए योजना बना रहा है जिसका समापन भारत की आजादी के 100 वर्ष पूर्ण होने के साथ होगा। इस काल को अमृतकाल कहा गया है। भारत को विकसित राष्ट्र बनाने में कृषि का महत्वपूर्ण योगदान रहने वाला है। प्रोफेसर चंद को 11 साल पहले 10 सितंबर 2015 को नीति आयोग का सदस्य बनाया गया था। उनके महत्वपूर्ण योगदान को देखते हुए वह लगातार तीसरी बार भी नीति आयोग के सदस्य बनाए गए।
प्रो चंद ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में सतत प्रयत्नशील हैं। सरकार का कृषि सेक्टर पर विशेष ध्यान है। वृद्धि एवं विकास का आधार पूंजी निवेश से होता है क्योंकि अच्छा निवेश हो रहा है। इसलिए वृद्धि हो रही है। 2019 के संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या अनुमान के मुताबिक भारत की जनसंख्या 2020 में डेढ़ सौ करोड़ और 2040 में 159 करोड़ हो जाएगी। यानि 2020 से 2030 के बीच प्रति वर्ष 0.857 फीसद की दर से और 2030 से 2040 के बीच 0.577 फीसद की दर से बढ़ेगी। अतिरिक्त आबादी की मांग को पूरा करने के अलावा, भूख और अल्प पोषण से संबंधित मुद्दों को हल करने के लिए भोजन की प्रति व्यक्ति खपत में वृद्धि करना भी अत्यंत आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि कृषि के चार मुख्य भाग हैं पहला- फसलें, दूसरा- पशु धन, तीसरा- मत्स्य (मछली पालन) और चौथा- वाणिकी। कुल कृषि उत्पादन में फसलों की हिस्सेदारी 54 फीसद, पशुधन की 31 फीसद, मछली 7 फीसदी और वाणिकी 8 फीसद। देश में पहले भूख थी फिर जबरदस्त उत्पादन हुआ और देश खाद्यान्न मामले में आत्मनिर्भर हो गया और अब उसका कृषि उत्पादन खपत से भी बहुत ज्यादा है। जिसका हमें उचित इस्तेमाल करना होगा उसके लिए निर्यात प्रोत्साहन एक महत्वपूर्ण उपाय है। प्रोफेसर रमेश चंद ने कहा कि खाद्यान्न के मामले में देश में खपत 2.7 फीसद की गति से बढ़ रही है और पैदावार की वृद्धि दर 4.5 फीसद है। इस अतिरिक्त खाद्यान्न की खपत बढ़ाने के नए स्रोत बढ़ाने पड़ेंगे। उनमें एक निर्यात है दूसरा जहां हम निर्यात को बढ़ाएं वहीं आयात को घटाएं। भारत दाल और खाद्य तेल अपनी मांग से आधे से ज्यादा आयात कर रहा है। यानि की इम्पोट कर रहा है। जाहिर है दालों और खाद्य तेलों के मामले में हमें आत्मनिर्भर बनाना है।
कृषि वैज्ञानिक ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस दिशा में सार्थक पहल कर रहे हैं। बीते वर्ष 2025 में राष्ट्रीय दाल मिशन और इसी तरह राष्ट्रीय खाद्य तेल उत्पादन का मिशन शुरू किया गया है। नीति आयोग ने इन विषयों पर अपनी सिफारिशें सरकार को सौंपी थीं उन पर काम शुरू हो गया है। भारत की जीडीपी में कृषि सेक्टर की हिस्सेदारी 18 फीसद है। प्रोफेसर रमेश चंद के मुताबिक किसी भी देश का जितना विकास होगा उसमें कृषि की हिस्सेदारी कम होती जाती है। विकसित राष्ट्रों में यह अनुपात 4 फीसद से कम है। विश्व बैंक के मुताबिक किसी भी देश को विकसित राष्ट्र बनने के लिए उसकी प्रति व्यक्ति आय 1400 डालर प्रति व्यक्ति प्रति वर्ष होनी चाहिए। चीन की प्रति व्यक्ति आय 14100 डालर है। यह अलग बात है कि इसके बावजूद चीन अभी तक विकसित राष्ट्रों की श्रेणी में शामिल नहीं है। भारत की प्रति व्यक्ति आय 2700 डालर है। अगले 21 वर्षों में हमें इसे छह गुणा बढ़ाना है।
उन्होने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयास हैं कि देश की आजादी के 100 वर्ष पूरा होने यानि 2047 तक भारत की प्रति व्यक्ति आय 14 हजार डालर के पार हो जाए। इसके लिए हमें वी-निर्माण (मैन्यूफैक्चर) क्षेत्र को बढ़ावा देने की जरूरत है। इस क्षेत्र में टैक्सटाइल यानि कपड़ा, धातु यानि मेटल, आटो मोबाइल इंडस्ट्रीज, आयल एंड गैस, फूड इंडस्ट्रीज, पावर सेक्टर पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। वी-निर्माण यानि मैन्यूफैक्चरिंग क्षेत्र की हमारी जीडीपी में 14 फीसद हिस्सेदारी, सेवाएं वाले क्षेत्र की जीडीपी में हिस्सेदारी 55 फीसद है जिसमें फुटकर और थोक दुकानदार, होटल उद्योग, वाणिज्य एवं व्यापार, संचार, रेस्टोरेंट, रक्षा, लोक प्रशासन आदि शामिल हैं और तीसरा कंस्ट्रक्शन यानि निर्माण जिसमें रेलवे स्टेशन, हवाई अड्डे, बंदरगाह, सड़कें आदि शामिल हैं। इसकी हिस्सेदारी 9 फीसद है। पिछले 10 वर्षों में देश के कृषि उत्पादन में बहुत उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
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