लखनऊ , नवम्बर 18 -- किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) के पल्मोनरी एवं क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग के प्रमुख प्रो. (डॉ.) वेद प्रकाश ने कहा कि सीओपीडी विश्व में मृत्यु का तीसरा प्रमुख कारण है। वर्ष 2025 में दुनिया भर में 50 करोड़ से अधिक लोग इससे प्रभावित रहेंगे जबकि 2023 में यह संख्या 48 करोड़ के आसपास थी। उन्होंने बताया कि भारत में 5.5 करोड़ से अधिक लोग सीओपीडी से पीड़ित हैं।

प्रो. (डॉ.) वेद प्रकाश ने मंगलवार को विश्व सीओपीडी दिवस-2025 की पूर्व संध्या पर आयोजित प्रेस कांफ्रेंस के दौरान कहा कि इस वर्ष के थीम का उद्देश्य सांस फूलने जैसे प्रारम्भिक संकेतों की अनदेखी न करने और समय पर जांच कराकर उचित उपचार अपनाने पर बल देना है। उन्होंने कहा कि धूम्रपान, बढ़ता प्रदूषण, घरेलू बायोमास ईंधन का उपयोग, औद्योगिक धूल-धुआँ और बार-बार होने वाले श्वसन संक्रमण इसके प्रमुख कारण हैं।

उन्होंने कहा कि पीएम2.5, पीएम10, नाइट्रोजन डाइऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड और सल्फर डाइऑक्साइड जैसे प्रदूषकों के लगातार संपर्क से फेफड़ों में सूजन और क्षति बढ़ती है, जिससे खांसी, बलगम, सांस लेने में कठिनाई, सीने में जकड़न और थकान जैसे लक्षण उभरते हैं। खराब वायु गुणवत्ता सीओपीडी रोगियों में सांस फूलना बढ़ाने के साथ अस्पताल में भर्ती होने का खतरा कई गुना बढ़ा देती है।

रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग के प्रो आर एस कुशवाहा ने कहा कि पल्मोनरी विभाग में सीओपीडी की स्टेजिंग, फेफड़ों की कार्यक्षमता जांच (स्पाइरोमेट्री), 6-मिनट वॉक टेस्ट, उच्च स्तरीय ऑक्सीजन थेरेपी, नॉन-इंवेसिव वेंटिलेशन, आईसीयू सुविधाएँ और पल्मोनरी रिहैबिलिटेशन उपलब्ध हैं, जो मरीजों को बेहतर जीवन गुणवत्ता प्रदान करने में मदद करती हैं। गंभीर रोगियों के लिए समय पर क्रिटिकल केयर पहुँच जीवन रक्षक सिद्ध होती है।

इस दौरान विशेषज्ञों ने सीओपीडी के उपचार में ब्रॉन्कोडाइलेटर, इन्हेल्ड कॉर्टिकोस्टेरॉइड, ऑक्सीजन थेरेपी, पल्मोनरी रिहैबिलिटेशन और सर्जरी को महत्वपूर्ण बताया। धूम्रपान छोड़ना सबसे प्रभावी रोकथाम है। बार-बार होने वाले श्वसन संक्रमण से बचाव, पोषण में सुधार, टीकाकरण और स्वच्छ वायु संपर्क इस बीमारी के खतरे को काफी हद तक कम कर सकते हैं।

इस मौके पर प्रो. (डॉ.) आनंद कुमार सिंह, डॉ. संदीप गुप्ता, डॉ. सचिन कुमार, डॉ. मोहम्मद आरिफ और डॉ. अनुराग राणा सहित अन्य वक्ताओं ने अपने विचार रखे।

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