नयी दिल्ली , अक्टूबर 25 -- केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने चिकित्सा शिक्षा के साथ-साथ स्वास्थ्य देखभाल के क्षेत्र में तेजी से बदलावों को रेखांकित करते हुए कहा कि भारत में स्वास्थ्य सेवा अब अधिक सुलभ और सस्ती हो गई है।
डॉ. सिंह ने शनिवार को दिल्ली विश्वविद्यालय के यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ मेडिकल साइंसेज (यूसीएमएस) के दीक्षांत समारोह में स्नातक और स्नातकोत्तर छात्रों को डिग्री प्रदान की और डॉक्टरों की नयी पीढ़ी से आग्रह किया कि वे करुणा में निहित रहते हुए नवाचार को अपनाएं।
उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में भारत में चिकित्सा शिक्षा में मूलभूत परिवर्तन आया है और मेडिकल कॉलेजों और प्रशिक्षण के अवसरों की संख्या में भारी वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा, "दस साल पहले, केवल लगभग 45 हजार स्नातक चिकित्सा सीटें थीं; आज यह संख्या लगभग डेढ़ लाख है।" उन्होंने कहा कि एम्स जैसे संस्थानों के विस्तार ने विभिन्न क्षेत्रों में चिकित्सा शिक्षा तक पहुँच को लोकतांत्रिक बनाया है और अधिक महिलाओं को चिकित्सा क्षेत्र में करियर बनाने में सक्षम बनाया है।
डॉ. सिंह ने बताया कि कैसे भारत में स्वास्थ्य बीमा पहले से मौजूद बीमारियों को कवर करने के लिए विकसित हुआ है - इस बदलाव को उन्होंने सार्वजनिक स्वास्थ्य नीति में "सबसे मानवीय नवाचारों में से एक" बताया। उन्होंने भारत के पहले स्वदेशी एंटीबायोटिक 'नैफिथ्रोमाइसिन' और न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन में प्रकाशित हीमोफीलिया के लिए जीन थेरेपी के सफल परीक्षणों की ओर इशारा करते हुए कहा कि ऐसी सफलताएँ निवारक और चिकित्सीय स्वास्थ्य सेवा में भारत के अग्रणी के रूप में उभरने को दर्शाती हैं।
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