जालंधर , नवंबर 17 -- भारत में समय से पहले जन्मे (प्रीमेच्योर) बच्चों की संख्या दुनिया में सबसे ज़्यादा है, जहां हर साल 30 लाख बच्चे समय से पहले जन्म लेते हैं और 3,04,000 की मौत होती है।
राष्ट्रीय प्रजनन एवं बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के सलाहकार और भारतीय प्रीमेच्योर बच्चों के लिए फाउंडेशन के कार्यकारी सदस्य डॉ. नरेश पुरोहित ने सोमवार को कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, आज समय से पहले जन्म, दुनिया भर में पांच साल से कम उम्र के बच्चों में मृत्यु का प्रमुख कारण बन गया है। उन्होंने विश्व प्रीमेच्योर दिवस के अवसर पर गुरदासपुर स्थित बटाला आयुर्विज्ञान संस्थान द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में एक वेबिनार को वर्चुअल रूप से संबोधित करते हुए समय से पहले जन्म के इस गंभीर मुद्दे की ओर ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, समय से पहले जन्म, जिसे गर्भावस्था के 37 सप्ताह से पहले जन्म के रूप में परिभाषित किया गया है, दुनिया भर में पांच साल से कम उम्र के बच्चों में मृत्यु का प्रमुख कारण बना हुआ है।
डॉ पुरोहित ने इस बात पर ज़ोर दिया कि समय से पहले जन्मे बच्चे सही समय पर उचित हस्तक्षेप से सामान्य जीवन जी सकते हैं। उन्होंने जन्म के समय एक किलो से कम वज़न वाले बेहद कम वज़न वाले बच्चों के इलाज में आने वाली चुनौतियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि सेप्सिस और सुपरबग्स से होने वाले संक्रमण समय से पहले जन्म का प्रमुख कारण पाए गए हैं। उन्होंने संक्रमणों की रोकथाम की आवश्यकता पर ज़ोर दिया।
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