नयी दिल्ली , फरवरी 03 -- भारत और भूटान ने मंगलवार को यहां ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग को मजबूत करने के लिए चर्चा की।

भूटान के ऊर्जा एवं प्राकृतिक संसाधन मंत्री लियोनपो जेम शेरिंग ने केंद्रीय विद्युत तथा आवास एवं शहरी मामलों के मंत्री मनोहर लाल और विद्युत तथा नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा राज्य मंत्री श्रीपद नाइक से मुलाकात की। तीनों नेताओं ने पुनात्सांगछू-2 हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट (1020 मेगावाट) से बिजली उत्पादन के वाणिज्यिक अनुकूलन पर चर्चा की।

बैठक में पुनात्सांगछू-1 हाइड्रोइलेक्ट्रिक परियोजना (1200 मेगावाट) को जल्द चालू करने पर जोर दिया गया। चर्चा में संकोश जलविद्युत परियोजना के भविष्य की राह पर भी बातचीत हुई।

भारत और भूटान के नेतृत्व ने पुनात्सांगछू-2 हाइड्रोइलेक्ट्रिक का उद्घाटन अगस्त 2025 में साथ-साथ किया था। भारतीय सहयोग से विकसित इस परियोजना से भूटान की विद्युत उत्पादन क्षमता में लगभग 40 प्रतिशत की वृद्धि होगी। पुनात्संगछु नदी पर स्थित इस परियोजना में 170 मेगावाट की छह इकाइयां शामिल हैं, जो क्षेत्रीय ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं।

संकोश (या सुनकोश) जलविद्युत परियोजना भूटान में एक प्रमुख प्रस्तावित जलाशय-आधारित जलविद्युत पहल है, जिसकी क्षमता 4,060 मेगावाट होने का अनुमान है। भारत के साथ संयुक्त रूप से विकसित, यह भूटान की नवीकरणीय ऊर्जा रणनीति का एक प्रमुख घटक है, जिसका उद्देश्य ऊर्जा सुरक्षा और निर्यात क्षमता को बढ़ाना है।

इसके अतिरिक्त, दोनों देशों ने 2040 तक की ट्रांसमिशन अवसंरचना योजना पर चर्चा की, जिसके लिए वर्तमान में विस्तृत परामर्श जारी हैं।

एक फरवरी को पेश किए गए आम बजट 2026-27 में भूटान को 2,288 करोड़ रुपये आवंटित किये गये हैं। यह भारत के किसी भी पड़ोसी देश को दी जाने वाली विकास सहायता का सबसे बड़ा हिस्सा है, जो पिछले वित्तीय वर्ष के लिए 1,950 करोड़ रुपये के संशोधित अनुमान से अधिक है।

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