जालंधर , फरवरी 12 -- भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के विरोध में बिजली बोर्ड , बैंक कर्मचारी यूनियनों सहित दस केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के एक संयुक्त मंच द्वारा गुरुवार को देशव्यापी 'भारत बंद' के आह्वान का पंजाब में मिलाजुला अवसर देखने को मिला। हड़ताल के दौरान सड़कों पर बसें चली, बाजार खुले रहे और बैंकों में अधिकारियों को छोड़ कर बाकी क्लर्क स्टाफ हड़ताल पर रहा। बंद से विभागीय कामकाज प्रभावित रहा।
पंजाब, हिमाचल प्रदेश, जम्मू और कश्मीर और हरियाणा समेत पूरे देश में लाखों बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों ने भी आज काम का बहिष्कार किया और विरोध रैलियां कीं।
चार नए श्रम कानूनों का विरोध कर रही कई किसान यूनियनों ने भी भारत बंद का समर्थन किया। इस बंद को राज्य की सत्तारूढ आम आदमी पार्टी (आप) समेत कई विपक्षी दलों ने अपना समर्थन दिया है। किसान संगठन और मजदूर संघ नई श्रम संहिताओं, बिजली बिल 2025, बीज बिल और हालिया भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के विरोध में सड़कों पर उतर रहे हैं। कई जिलों में इसका मिलाजुला असर देखने मिल रहा है। अनुबंध पर काम करने वाले कर्मी भी हड़ताल पर हैं लेकिन स्थायी कर्मी सेवाएं मुहैया करवा रहे हैं।
यूको बैंक कर्मचारी यूनियन के महासचिव और पंजाब नेशनल बैंक कर्मचारी संघ के संयुक्त सचिव एच एस वीर ने बताया कि भारतीय स्टेट बैंक को छोड़ कर शेष सभी बैंकों की कर्मचारी यूनियनें इस हड़ताल में शामिल हैं। उन्होंने कहा कि उच्च अधिकारियों को छोड़ कर क्लर्क स्टाफ हड़ताल पर है। हड़ताल के कारण बैंक में काउंटर सर्विस प्रभावित हुई हैं जबकि डिजिटल तरीके से लेनदेन सुचारू रूप से जारी है। हड़ताल के कारण राज्य में लगभग 20 हजार करोड़ रुपये का लेनदेन प्रभावित होने का अनुमान है।
पंजाब, हिमाचल प्रदेश, जम्मू और कश्मीर और हरियाणा समेत पूरे देश में लाखों बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों ने आज काम का बहिष्कार किया और विरोध रैलियां कीं। इन लोगों ने बिजली सेक्टर (डिस्ट्रीब्यूशन, ट्रांसमिशन और जेनरेशन) में प्राइवेटाइजेशन को वापस लेने, इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल, 2025 को वापस लेने, प्रस्तावित नेशनल इलेक्ट्रिसिटी पॉलिसी, 2026 को वापस लेने और चल रहे निजीकरण को रोकने, बिजली सेक्टर के कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन स्कीम को बहाल करने की मांग की।
ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन (एआइपीईएफ) के चेयरमैन शैलेंद्र दुबे ने कहा कि पहली बार किसान संगठन और सेंट्रल ट्रेड यूनियन भी हमारे साथ खड़े हैं। दुबे ने कहा कि बिजली सेक्टर के कर्मचारियों, इंजीनियरों, मज़दूरों और किसानों की भागीदारी से आज यह आज़ाद भारत के सबसे बड़े इंडस्ट्रियल एक्शन में से एक बन गया है। एआईपीईएफ ने यह भी चिंता जताई है कि वितरण, उत्पादन और संचरण समेत पावर सेक्टर का निजीकरण गरीब उपभोक्ताओं, छोटे और मध्यम उद्योग और आम जनता के लिए नुकसानदायक होगा।
पीएसईबी इंजीनियर्स एसोसिएशन के महासचिव अजयपाल सिंह अटवाल ने कहा कि पंजाब में अलग-अलग कर्मचारी यूनियनों ने पूरी हड़ताल की और पावरकॉम के इंजीनियरों ने हड़ताल की ड्यूटी से मना कर दिया। कर्मचारियों का वर्क बॉयकॉट बड़े शहरों और कस्बों में साफ दिख रहा था। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक, तेलंगाना, तमिलनाडु, केरल, आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश समेत लगभग सभी राज्यों में वर्क बॉयकॉट किया गया।
एआइपीईएफ के मीडिया सलाहकार वी के गुप्ता ने कहा कि मांगों का मेमोरेंडम डिस्कॉम्स के प्रबंधक निदेशक, राज्य सरकार और केंद्र सरकार को सौंपा गया।
केंद्रीय ट्रेड यूनियनों, कर्मचारी संघों और संयुक्त किसान मोर्चा ने आज होशियारपुर जिले में प्रदर्शन किया। होशियारपुर कस्बे में, महिलाओं सहित प्रदर्शनकारी शहीद उधम सिंह पार्क में एकत्र हुए और बस स्टैंड तक मार्च किया, जहां उन्होंने निकास द्वार के सामने एक रैली निकाली और नारे लगाए। यूनियनों के नेताओं ने कहा कि प्रस्तावित नीतिगत उपाय जैसे कि विद्युत (संशोधन) विधेयक, 2025 और अन्य सुधार श्रमिकों, किसानों और कर्मचारियों पर प्रतिकूल प्रभाव डालेंगे।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित