नयी दिल्ली , जनवरी 25 -- भारत अपने गणतंत्र दिवस के अवसर पर लगभग हर साल किसी न किसी देश के शासनाध्यक्ष या राजनेता को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित करता रहा है। यह आमंत्रण दो देशों या समूहों के बीच कूटनीतिक संबंधों को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण साधन के रूप में इस्तेमाल होते रहे हैं, लेकिन ऐसा भी हुआ है कि इस समारोह में पड़ोसी और धुर-प्रतिद्वंद्वी देश पाकिस्तान के राजनेताओं को दो बार आमंत्रित किया है।

अपने पांचवें गणतंत्र दिवस (1955) में भारत ने पहली बार अपने पड़ोसी देश पाकिस्तान के तत्कालीन गवर्नर जनरल मलिक गुलाम मोहम्मद को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया था। यह आज के कटु संबंधों को देखते हुए एक असंभव सी बात लगती है, लेकिन तब भी रिश्तों में कोई बहुत मिठास नहीं थी, हालांकि तब इतनी खटास भी नहीं थी।

दोनों नवनिर्मित देश अपनी-अपनी समस्याओं से तो जूझ ही रहे थे, लेकिन अपने संबंधों को लेकर भी जूझ रहे थे, ऐसे में भारत ने मलिक गुलाम मोहम्मद को आमंत्रित कर एक उदार और साहसी कदम उठाया था। मलिक गुलाम मोहम्मद ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से पढ़ाई की थी और हैदराबाद निजाम के लिए वित्तीय सलाहकार के रूप में काम किया था। तब दोनों देशों के आकार लेते रिश्तों की पृष्ठभूमि में भारत यह उम्मीद कर रहा था कि श्री मोहम्मद के भारत से व्यक्तिगत जुड़ाव का दोनों देशों के संबंधों को सकारात्मक लाभ होगा।

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