नयी दिल्ली , जनवरी 07 -- केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बुधवार को कहा कि भारत जैव-बिटुमेन का व्यावसायिक उत्पादन करने वाला दुनिया का पहला देश बन गया है।

श्री गडकरी ने बुधवार को यहां वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद के प्रौद्योगिकी हस्तांतरण समारोह 'फ्रॉम फार्म रेज़िड्यू टू रोड: पायरोलिसिस के माध्यम से बायो-बिटुमेन' को संबोधित करते हुए इस उपलब्धि को भारत के सड़क बुनियादी ढांचे के लिए एक ऐतिहासिक मील का पत्थर बताया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार कृषि अपशिष्ट को एक बहुमूल्य राष्ट्रीय संसाधन में बदला जा सकता है। जैव-बिटुमेन को उन्होंने विकसित भारत 2047 के विज़न की दिशा में एक परिवर्तनकारी कदम करार दिया।

सड़क परिवहन मंत्री ने कहा कि कृषि से उत्पन्न अपशिष्ट का उपयोग करने से फसल अवशेष जलाने से होने वाले प्रदूषण में कमी आती है और चक्रीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलती है। उन्होंने कहा कि 15 प्रतिशत मिश्रण से देश को लगभग 4,500 करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा की बचत हो सकती है और आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता में उल्लेखनीय कमी आएगी।

मंत्री के अनुसार यह पहल किसानों को सशक्त बनाएगी, ग्रामीण क्षेत्रों में नए आजीविका के अवसर पैदा करेगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देगी।

श्री गडकरी ने कहा कि जैव-बिटुमेन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार की सतत विकास, आत्मनिर्भरता और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार विकास की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

उन्होंने इस ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए अनुसंधान परिषद और उसके वैज्ञानिकों को बधाई दी तथा निरंतर सहयोग के लिए अपने सहयोगी मंत्री जितेंद्र सिंह के प्रति आभार व्यक्त किया।

जैव-बिटुमेन एक नवीकरणीय, पेट्रोलियम-मुक्त सामग्री है, जिसमें चिपकने वाले गुण होते हैं और इसका उपयोग सड़कों के निर्माण तथा वॉटरप्रूफिंग में किया जाता है। यह कृषि से उत्पन्न जैविक अपशिष्ट जैसी सामग्रियों से तैयार किया जाता है और पारंपरिक बिटुमेन का एक विकल्प है।

इसके उत्पादन की लागत पारंपरिक बिटुमेन की तुलना में कम हो सकती है और यह पर्यावरण के अनुकूल भी है। देश का सड़क नेटवर्क 63 लाख किलोमीटर से अधिक का है, जो दुनिया में दूसरा सबसे बड़ा है, और देश की लगभग 90 प्रतिशत सड़कों में बिटुमेन का उपयोग होता है।

अभी देश में 88 लाख टन बिटुमेन की खपत होती है, जो भविष्य में बढ़कर 100 लाख टन तक पहुंचने की संभावना है। इसमें से 40 से 50 प्रतिशत बिटुमेन का आयात किया जाता है, जिस पर सालाना 25,000 से 30,000 करोड़ रुपये का खर्च आता है। अनुमान है कि कृषि बायोमास से लगभग 85 लाख टन जैव-बिटुमेन का उत्पादन संभव है।

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