पटना , फ़रवरी 06 -- बिहार विधानसभा के अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने शुक्रवार को कहा कि भारत सदियों से कृषि प्रधान देश रहा है और हमारी सभ्यता की जड़ें खेत-खलिहानों और हमारी विविध खाद्य परंपराओं में निहित हैं।

डॉ प्रेम कुमार आज "प्रकृतिका 2026 - चौथा अनोखा बनर्जी बीज एवं खाद्य विविधता महोत्सव" कार्यक्रम में भाग लेते हुए कहा कि आज पूरी दुनिया जलवायु परिवर्तन, खाद्य असुरक्षा और प्राकृतिक संसाधनों के क्षरण जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है। उन्होंने कहा कि ऐसे महोत्सव हमें यह स्मरण कराते हैं कि समाधान हमारी अपनी धरती, हमारे देशी बीजों और पारंपरिक ज्ञान में ही छिपा हुआ है।

विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि इस वर्ष की थीम - "लचीली खाद्य प्रणालियों के लिए माइसीलियम और ट्रेंचेस का पुनर्जीवन" - अत्यंत प्रासंगिक और दूरदर्शी है।उन्होंने कहा कि यह थीम हमें यह संदेश देती है कि यदि जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटना है, तो हमें मिट्टी की सेहत सुधारनी होगी, जल संरक्षण की पारंपरिक तकनीकों को पुनर्जीवित करना होगा और देशी बीजों की विविधता को संरक्षित करना होगा।

उन्होंने कहा कि माइसीलियम मिट्टी की जीवनशक्ति का प्रतीक है, जो भूमि को उर्वर बनाता है, और ट्रेंचेस जल प्रबंधन का सशक्त माध्यम हैं। इन दोनों का पुनर्जीवन हमारे कृषि तंत्र को अधिक टिकाऊ और सशक्त बना सकता है।

डॉ. कुमार ने इस बात पर प्रसन्नता व्यक्त की कि इस महोत्सव में देश के लगभग 20 राज्यों से किसान, कृषि विशेषज्ञ, शोधकर्ता, फूड इनोवेटर, महिला समूह और युवा सहभागी बन रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह विविधता ही हमारे देश और समाज की सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने कहा कि जब किसान और वैज्ञानिक साथ बैठकर संवाद करते हैं, महिलाएं अपने पारंपरिक खाद्य ज्ञान को साझा करती हैं और युवा नवाचार के साथ जुड़ते हैं,तब एक सशक्त और आत्मनिर्भर खाद्य प्रणाली का निर्माण होता है।

विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि बिहार की धरती सदैव कृषि और संस्कृति की समृद्ध भूमि रही है। यहाँ की मिट्टी ने अनेक पारंपरिक फसलों, मोटे अनाजों, दालों और सब्जियों को जन्म दिया है। आज आवश्यकता है कि हम अपने देशी बीजों को संरक्षित करें, जैविक खेती को बढ़ावा दें और स्थानीय खाद्य प्रणालियों को मजबूत बनाएं। इससे न केवल किसानों की आय में वृद्धि होगी, बल्कि आमजन को पौष्टिक और सुरक्षित भोजन भी उपलब्ध होगा। उन्होंने विशेष रूप से महिला समूहों और युवाओं की भागीदारी की सराहना कि और कहा कि महिलाओं ने सदैव बीज संरक्षण और पारंपरिक व्यंजनों की परंपरा को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। वहीं युवा पीढ़ी तकनीक और नवाचार के माध्यम से कृषि को नए आयाम दे सकती है। उन्होंने कहा कि यदि परंपरा और तकनीक का समन्वय हो जाए, तो कृषि क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन संभव है।

श्री कुमार ने जैविक और प्राकृतिक खेती को अपनाने और जल तथा मिट्टी के संरक्षण को प्राथमिकता देने पर बल दिया और कहा कि स्थानीय खाद्य प्रणालियों को सशक्त बनाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि प्रकृति के साथ संतुलन ही हमारे अस्तित्व की कुंजी है। यदि हम अपनी मिट्टी, अपने बीज और अपने जल स्रोतों की रक्षा करेंगे, तो हमारा भविष्य सुरक्षित रहेगा।

इस अवसर पर जस्टिस नीलू अग्रवाल, पटना नगर निगम, महापौर सीता साहू, एम थॉमस, कर्नल सोमेंद्र पांडे, गुरु प्रिया सिंह, राकेश नाथ चौबे, प्रोफेसर वसी अहमद सहित अन्य मौजूद थे।

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